लाडवा
- मुरादनगर का किसान सूबे सिंह अपने कौशल से किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बना हुआ है। अपने स्तर पर ही नए तरीके अपना कर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाकर सूबे सिंह न केवल अच्छी आमदनी कर रहा है, बल्कि सहायक धधों को अपनाकर नए आयाम भी स्थापित कर रहा है। सूबे सिंह ने मधुमक्खी पालन का व्यवसाय बिना किसी सरकारी सहायता के शुरू किया और अब वह सैकड़ों डिब्बे तैयार करके मिशाल कायम की है। वहीं मछली पालन में तालाब ठेके पर लेकर लाभ कमाया है। यही नहीं पिछले तीन वर्षो से यह फसलों में विविधता अपनाकर सफल प्रयोग कर रहा है। जहा कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र विभिन्न तरीके अपना कर ग्रीष्मकालीन मूंग को किसानों की पसंद बनाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं सूबे सिंह अपने स्तर पर प्रयोग करके इसके लाभकारी स्थापित कर चुका है। उसके अनुसार जब तीन वर्ष पहले गेहूं के बाद मूंग की बिजाई की थी तो खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए ही की थी, लेकिन जब मूंग पर फलिया आने लगी तो लेबर लगाकर उनको चुगवाना आरंभ कर दिया। इस प्रकार उसको प्रति एकड़ तीन से चार हजार रुपये तक लाभ हो गया। उसके बाद गत वर्ष उसने छह एकड़ में मूंग की बिजाई की तो तकरीबन 40 हजार रुपये का लाभ कमाया। इस वर्ष सूबे सिंह ने अपने तरीके से ही बिना किसी कृषि विशेषज्ञ की सलाह के दो एकड़ खड़ी गेहू की फसल में अंतिम रोपाई पर मूंग की बिजाई कर दी। अब वह मूंग बहुत अच्छी उग चुकी है।
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