कुरुक्षेत्र(नरेंद्र धूमसी
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के निधन से पुरे प्रदेश में शोक की लहर है। भजनलाल के चले जाने के बाद उनके नजदीक रहने वाले लोगों की आंखों में उनके बारे में बताते समय आंसू छलक जाते हैं। भजन लाल दिन रात लोगों की सेवा में लगे रहते थे। अगर रात को कोई व्यक्ति उनसे मिलने आता था और उससे मिले बिना ही चला जाता तो वे सुबह अपने नजदीकी व अंग रक्षकों को भी आड़े हाथों ले लेता थे। लेकिन कुछ ही देर में शांत हो जाते थे। भजन लाल के साथ 18 साल तक साये की तरह उनके साथ रहने वाले अंगरक्षक राजकुमार ने उनके साथ बीते लम्हों को जगत क्रांति के साथ सांक्षा किया। जिला अंबाला के बराड़ा हल्का गांव के तंदवाली निवासी राजकुमार ने भजन लाल के साथ बीते समय को याद करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भजन लाल की सरकार के वक्त 24 जून 1993 को उनकी पुलिस में भर्ती हुई थी तभी से उनके अंगरक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंंने बताया कि भजन लाल हर रोज सुबह साढ़े पांच बजे उठ जाते थे। चाय के साथ अखबार पढऩे के बाद वह अंदर जाकर तैयार होने के बाद लोगों की समस्याएं सुनते थे। एक बजे से तीन बजे तक आराम करते और फिर दोपहर बाद तीन बजे लोगों के बीच होते। उन्होंने बताया कि एक बार कुरुक्षेत्र के पेहवा हल्के में उनकी रेैली थी तो कुछ आंतकवादियों ने उनको रैली तक नहीं पहुंचने की धमकी दी हुई थी लेकिन वे निडर थे और पिहोवा में उस रैली में शामिल हुए। राजकुमार अब हैडकांस्टेबल के पद पर हैं। उन्होंने नम आंखों से बताया कि उन्होंने जिंदगी का एक लंबा समय भजनलाल के साथ साए की तरह बीताया है। भजन लाल ने उनको एक बच्चे की तरह अपने साथ रखा। कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी।
भजन लाल का जिस दिन देहांत हुआ उस दिन का जिकर करते हुए राजकुमार ने बताया कि हिसार में साढ़े बारह बजे जैसे ही भजन लाल कमरे के अंदर जाने लगे तो उन्होंने अचानक उनका का कंधा पकड़ा। राजकुमार को ऐसा लगा कि वे गिरेंगे तो उन्होंने भजनलाल को बांहो उठाकर अंदर ले गए। तभी उनको एक झटका सा महसूस हुआ। 12 बजकर 40 मिनट पर उनको अटैक पड़ा और फिर दो-तीन मिनट बाद दोबारा अटैक पड़ा। उसके बाद भजन लाल को हिसार के सपरा अस्पताल में भर्ती करवाया गया। करीब आधे घंटे बाद डाक्टरों ने उसे हार्ट के अस्पताल रविंद्र में रैफर कर दिया। जैसे उनको दिल्ली ले जाने की तैयारी की जा रही थी तो डाक्टरों ने पांच-साढ़े बजे उनको मृत घोषित कर दिया।
भजनलाल के अंगरक्षक आज उनके साथ बीताए हर लंहे को याद करते हैं। उनको पता ही नहीं चला कि जिंदगी के 18 साल उन्होंने ऐसी महान शख्सियत के साथ बीताएं हैं। एक खास बात यह है कि राजकुमार भजन लाल के सबसे विश्वास पात्रों में से एक थे। जिन पर भजनलाल आंखे मूंद कर विश्वास करते थे।
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