Friday, June 17, 2011

इन्द्री में भारत साक्षर मिशन कार्यक्रम पड़ा है ठप्प


इन्द्री विजय काम्बोज
केंद्र सरकार द्वारा सर्व शिक्षा अभियान पर करोड़ों रूपए खर्च करके गांव-गांव में शिक्षा की अल्ख जगाने के लिए अनेकों अभियान चलाए गए हैं। लेकिन करनाल में जुलाई 2010 में आया भारत साक्षर मिशन कार्यक्रम नाम से प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ रहा है। सर्व शिक्षा अभियान द्वारा जिला प्रशासन को अब की बार भी करोड़ों रूपए का प्रोजेक्ट मिला है लेकिन प्रशासन द्वारा भर्ती की गई प्रेरकों की फौज मौज कर रही है। कुछ गिने चुने पुराने प्रेरक ही साक्षरता की गाड़ी को धकेल रहे हैं। इंद्री में प्रोजेक्ट का काम बंद के बराबर है। अगर मानदेय की बात की जाए तो पिछले दौर में चले साक्षरता कार्यक्रम में काम करने वाले प्रेरकों के मुकाबले इस बार प्रोजेक्ट में मानदेय भी चार गुणा कर दिया गया है। लेकिन इसके बावजूद भी नए भर्ती किए गए प्रेरक आराम फरमा रहे हैं और ब्लॉक कोर्डिनेटर फील्ड में जाने की बजाए आराम से दफ्तरों में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। नए भर्ती की गई फौज को अब तक कोई खास ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है।  
            इंद्री के 82 गांव में 164 प्रेरक नियुक्त किए गए हैं और उनकी नियुक्ति को कई महीने बीत जाने के बाद भी साक्षरता का काम ठप्प पड़ा है। एक सर्वे के अनुसार इंद्री के ग्रामीण इलाकों में 15 साल से ऊपर की उम्र के करीब 23 हजार अनपढ़ हैं। इंद्री में सबसे ज्यादा अनपढ़ की संख्या  बीबीपुर ब्राहणान में करीब 1410 है। ब्लॉक कोर्डिनेटर संजीव कुमार के अनुसार सांतड़ी नौरता, पटहेड़ा, खेड़ी मानसिंह, फुंसगढ़, गढ़ीजाटान व कादराबार गांव में कुछ काम की शुरुआत हो रही है। बाकी गांवों में कुछ काम नहीं हुआ है।जब इस बारे में जिला कार्यालय में तैनात एपीओ पूजा से बात की गई तो उनका कहना है कि अभी तक नए प्रोजेक्ट का सामान नहीं आया है। जल्द ही जिले में दोबारा नए साक्षरता केंद्र खोलें जाएंगे। उन्होंने माना कि नए भर्ती किए गए प्रेरकों व अन्य कर्मचारियों की कोई ट्रैनिंग अब तक नहीं हुई है। वैसे वातावरण निर्माण का कार्य जिले में कई जगह चला हुआ है। उन्होंने बताया कि जिले में 15 साल से ऊपर उम्र के 95 हजार के करीब अनपढ़ सर्वे में आए हैं और 10-15 गांवों मे सर्वे होना बाकी है।



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