Saturday, July 2, 2011

यमुना के पानी के कटाव से किसानों की भूमि हो रही लील


इन्द्री विजय काम्बोज
प्री-मानसून के चलते ही समय से पहले ही यमुना नदी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। जिसके चलते यमुनानदी के साथ लगते गांवों कलसौरा और कमालपुर गडरियान में भूमि कटाव होना भी शुरू हो गया है। फिलहाल यह कटाव मध्यम गति से हो रहा है। लेकिन अगर यही स्थिति रही तो भूमि कटाव का दृश्य गत वर्ष से भी भयंकर होगा। किनारों पर हो रहे भूमि कटाव को लेकर किसान चिंता में है। किसानों ने भूमि कटाव को देखते हुए पापुलर को भी काटना शुरू कर दिया है। लेकिन प्रशासन का इस ओर अभी तक कोई ध्यान नहीं है। बाढ़  बचाव के नाम पर जो कार्य किए गए है वो कटाव को रोकने में असमर्थ दिखाई दे रहे है। यमुना से सटे गांवों के ग्रामीणों को इस बार बाढ़ के कारण भयंकर तबाही का अंदेशा लगा हुआ है। ग्रामीण ओमपाल मढाण,मनीराम,जीता राम ,रामकुमार, रामदिया, कर्मसिंह,लाभसिंह ,नंबरदार,बलवान,सुलेखचंद,रामपाल,रामकिशन, ने बताया कि हर वर्ष अगस्त व सिंतबर माह के बाद यमुनानदी में पानी आता था। लेकिन इस बार भारी बारिश के कारण यमुनानदी में लगभग एक से डेढ़ माह पहले ही पानी आना शुरू हो गया है। जिसे देखकर लगता है कि इस बार यमुनानदी की बाढ़ गत  वर्ष के रिकॉर्ड भी तोड़ेगी।यमुनानदी में आए पानी के बाद यमुना के किनारों पर कटाव जारी हो चुका है। पिछले वर्ष भी कटाव के कारण लोगों को अपनी बेशकीमती जमीनों से हाथ धोना पड़ा था। लेकिन प्रशासन से इस स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। ग्रामीणों का मानना है कि इस बार जमीनों के साथ साथ उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। क्योंकि कटाव की स्थिति में यमुना इस वर्ष आबादी क्षेत्रों तक मार करेगी।अगस्त-सितंबर 2010 में आई भयंकर बाढ़ ने किसानों की जमीन को खोखला कर दिया था। जिस कारण अब किनारें रेत की ढाल में तबदील हो गये है। जिन्हें देखकर बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब यमुना की बाढ़ के आगे ये किनारें किस कदर ग्रामीणों को सुरक्षा दे पायेगें। प्रशासन द्वारा लाखों रूपया खर्च करने के बाद किनारों पर जो बाढ़ बचाव कार्य करवाए गए है उन्हें देखकर किसान व ग्रामीण संतुष्ट नहीं है। ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साध कर मामले की पूरी जानकारी देने में लगे हुए है। लेकिन ग्रामीणों को कुछ भी हाथ लगता नहीं दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ बचाव के लिए जिस तरह से कार्य करवाया गया है उससे किनारों पर हो रहे कटाव को नहीं रोका जा सकता। इसलिए तो यमुना के किनारें पहले पानी की मार ही नहीं झेल पा रहे है। किनारों पर लगातार धीरे धीरे कटाव होना जारी है। अगर अब भी प्रशासन ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए तो परिणाम भयानक होगें। कटाव के डर से यमुना के मुहाने पर स्थित किसानों ने अपने खेतों से पापुलर के पेड़ों को काटना शुरू कर दिया है। क्योंकि गत वर्ष जब कटाव हुआ था तो किसानों को जमीन के साथ साथ अपनी गन्नें, चेरी व धान की फसल के अलावा पापुलर के पेड़ो को भी गंंवा दिया था। जिसे देखकर इस बार किसान पहले से ही सर्तक हो रहे है। किसान ओमपाल मढाण का कहना है कि यमुना नदी के पानी से हो रहे कटाव के कारण किसानों की सैंकड़ों एकड़ भूमि यमुना में समा गई है। यहां तक कि काफ ी किसानों के पास बहुत कम भूमि बची है। उन्होंने बताया कि 1964 में इसी यमुना के पानी से हुए कटाव के कारण कमालपुर गडरियान,डबकौली कलां व चौरा गांव पूरी तरह से बर्बाद हो गये थे। इन गांवों को दोबारा से अलग जगह पर बसाया गया था। अब फि र यह कटाव उसी दिशा में हो रहा है। यदि प्रशासन ने इस ओर ध्यान न दिया तो कहीं पहले की तरह लोगों को तबाही का मंजर न देखना पड़े। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि  इस कटाव को देखते हुए इसकी रोकथाम के अतिशीघ्र उपाय किये जायें।

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