Friday, July 1, 2011

पक्षपात के बिना निर्णय करने वाला ही अच्छा जज बन सकता है



घरौंडा- 1 जुलाई(प्रवीन सोनी) 
धैर्य से सुनना, बुद्विमता से विचार करना और पक्षपात किए बिना निर्णय करनेवाला ही एक अच्छा जज हो सकता है। यह उद्गार भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश  पद्मविभूषण जस्टिस डा0 ए एस आनंद ने आज यहां अकादमी के सरदार पटेल हॉल में व्यक्त किए। जस्टिस आनंद, हरियाणा सिविल सेवा (न्यायिक शाखा) के नवनियुक्त अधिकारियों के पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। आज संपन्न हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आरम्भ 16 जून को हरियाणा के लोकायुक्त जस्टिस प्रीतमपाल द्वारा किया गया था। मुख्य अतिथि जस्टिस आनंद ने इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। 
जस्टिस डा0 आनंद ने कहा कि अपराध न्याय प्रणाली का आरम्भ अनुसंधान से होता है। अनुसंधान में सबसे पहला काम प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखना है जिसे अनुसंधान अधिकारी लिखता है जो इतना पढ़ा-लिखा नहीं होता जितना की उस प्रथम सूचना रिपोर्ट पर कोर्ट में बहस करने वाला वकील। और इसी कारण वकील कुछ न कुछ कमिंया प्रथम सूचना रिपोर्ट में खोज कर अभियुक्त को बरी कराने में सफल हो जाता है। उन्हेिंने कहा कि न्यायपालिका और पुलिस को आपस में एक होने की जरूरत नहीं है लेकिन उन्हें एक दूसरे का सहयोगी होना चाहिए ताकि अपराध न्याय प्रणाली मजबूत हो और समाज को न्याय मिल सके। 
उन्होंने न्यायायिक अधिकारियों से आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें अनुसंधान की कमियों को ध्यान में रखना चहिए लेकिन इन कमियों का प्रयोग आलोचना के लिए नहीं बल्कि मार्गदर्शन के लिए किया जाना चाहिए। पीडि़त व्यक्ति को न्याय की उम्मीद रहती है। जिसे न्यायायिक अधिकारी एवं अनुसंधान अधिकारी अलग-अलग रहते हुए किंतु सहयोगी भावना से पूरा कर सकते हैं  |

- मधुबन पुलिस अकादमी में पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को संबोधित करते अधिकारी। 
छाया-तेजबीर

जस्टिस आनंद ने न्यायालयों में लंबित मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देशभर में 1200 पद मैजिस्ट्रेटों के रिक्त पड़े हैं जो मामले की सुनावाई में देरी का एक बड़ा कारण है। न्याय में देरी से समाज को न्याय व्यवस्था की आलोचना करने का अवसर मिलता है। उन्होंने रिक्तियों के कारण कामकाज प्रभावित होने से बचने का उपाय सुझाते हुए कहा कि किसी भी जज की सेवानिवृति की तारीख पहले से ही मालूम होती है अत: उससे पहले की नये जज को भर्ती कर प्रशिक्षित कर दिया जाना चाहिए ताकि बिना किसी मानव कार्यदिवस को गंवाए सुनवाई प्रक्रिया जारी रहे। लंबित मामलों को काफी हद तक समाप्त किया जा सकेगा। 
इससे पूर्व हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक/पुलिस महानिरीक्षक सुधीर चौधरी ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि जस्टिस आनंद ने गिरफ्तारी एवं हिरासत के संबन्ध में डी के बासु मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय की अनुपालना से पुलिस की मानसिकता में बदलाव आया है तथा मानवीय पक्ष मजबूत हुआ है।  चौधरी ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में एचसीएस ज्यूडिशियल ब्रांच के 28 नवनियुक्त अधिकारियों ने भाग लिया जिनमें  12 महिला अधिकारी भी हैं।  प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान इन अधिकारियों को पुलिस की कार्यप्रणाली, शस्त्र, फोरेंसिक विज्ञान, अपराध न्याय व्यवस्था-वर्तमान एवं भविष्य, प्रत्यार्पण प्रक्रिया, साइबर अपराध, सामुदायिक पुलिसिंग जैसे पेशेवर विषयों के साथ इनके व्यक्तित्व के विकास के लिए संवेदीकरण, तनाव प्रबन्धन आदि विषयों पर शैक्षणिक एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गयी। चौधरी ने मुख्य अतिथि जस्टिस आनंद को अकादमी की ओर से  स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। 
इस अवसर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक एवं अकादमी के जिला न्यायवादी श्री शशिकांत शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों द्वारा दी गई राय एवं सुझावों की  रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों का धन्यवाद किया।  प्रतिभागियों की ओर से सिरसा की ज्यूडिशियल अधिकारी मेनका ङ्क्षसह ने विचार रखे। 
इस अवसर पर हरियाणा ज्यूडिशियल अकादमी चंडीगढ के शैक्षणिक निदेशक प्रो0 वीरेन्द्र कुमार एवं उनकी पत्नी डा0 प्रज्ञा कुमारी, पुलिस अनुसंधान एंव विकास ब्यूरो के पूर्व निदेशक श्री एनसी जोशी, एससीआरबी के निदेशक श्री लायकराम डबास, एफएसएल मधुबन के निदेशक श्री एस के सांगवान, अकादमी के उप महानिरीक्षक श्री एसके जैन, उप महानिरीक्षक डा0 सुमन मंजरी, राज्य अपराध ब्यूरो, मधुबन के पुलिस अधीक्षक श्री राजेन्द्र कुमार सहित अनके वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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