पुलिस प्रशासन का सहयोग न मिल पाने के कारण ग्रामीणों ने की नारेबाज़ी।
घरौंडा,करनाल (प्रवीन सोनी)
खाद्दर इलाके में पड़ी सैंकड़ों एकड़ विवादित भूमि का मामला एक बार फिर गरमा गया है। जिला प्रशासन के आदेश पर इस भूमि का कब्ज़ा लेने के लिए तीन गांवों के हज़ारों ज़मीदार अमृतपूर कलां के समीप एकत्रित हो गए। लेकिन पुलिस प्रशासन का सहयोग ने मिल पाने के कारण आज किसी भी कार्रवाई को अज़ाम नही दिया जा सका। गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रकट करते हुए जमकर नारेबाज़ी की और चेतावनी दी कि अगर कल तक पुलिस प्रशासन का सहयोग नही मिला तो वे स्वयं इस ज़मीन का कब्ज़ा ले लेंगे।
गांव अमृतपूर कलां, केरवाली, कालरों, भरतपूर, लालुपूरा, अराईपूरा डेरा व अमृतपूर खुर्द गांव के बीच करीब सात सौ एकड़ ज़मीन की चकबंदी का मामला पिछले कई वर्षो से चला आ रहा है और इस चकबंदी को लेकर अनेक बार इन गांवों के लोग आमने सामने भी हो चुके है। कई बार तो इन ग्रामीणों के बीच मरने मारने तक की भी नौबत आ चुकी है।
उच्च न्यायालय से पूरे मामले पर विराम लगने के बाद जिला प्रशासन के लिखित आदेश पर सोमवार को गांव अमृतपूर कलां, अमृतपूर खुर्द व कैरवाली के हज़ारों ग्रामीण इस विवादित ज़मीन पर कब्ज़ा लेने के लिए सुबह के समय से ही मौके पर एकत्रित हो गए। मौके पर पूर्व सरपंच रतन सिंह, नम्बरदार सपट्टर सिंह, जिले सिंह, बलजीत ङ्क्षसंह, सुखा सिंह, करण ङ्क्षसह, प्रेमसिंह, मेहरसिंह, सतीश कुमार व सतपाल ङ्क्षसंह आदि ने बताया कि इन तीनों गांवों की हज़ारों एकड़ भूमि पर चकबंदी का मामला 1999 से चला आ रहा है और इस भूमि के मसले को लेकर दोनों पक्षों के लोग सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके है और हमारे ह$क में फैसला होने के बाद भी यह मामला सालों तक न्यायालयों के चक्कर काटता रहा और अंत में 9 फरवरी 2011 को उच्च न्यायालय ने पूरे फै सले की हमारे पक्ष में मोहर लगा दी थी। फैसले को लेकर हम जिला उपायुक्त से मिले और जिला उपायुक्त द्वारा तीन बार संबंधित अधिकारियों को विवादित करीब पांच सौ एकड़ भूमि पर तीनों गांवों के ग्रामीणों को कब्ज़े दिलाने के आदेश दिए। लेकिन पुलिस प्रशासन की लापरवाही के कारण इस भूमि पर हमारा कब्ज़ा नही हो पाया और अब जिला उपायुक्त द्वारा 9 जून को पत्र क्रमांक 55886-90/एमए-11 के तहत संबंधित अधिकारियों को 13 व 14 जून को मौके पर पहुंचने के आदेश जारी कर दिए और जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार आज सुबह से ही तीनो गांवों के हज़ारों ग्रामीण ट्रेक्टरों समेत मौके पर पहुंच गए लेकिन दोपहर तक पुलिस प्रशासन की मदद न मिलने के कारण ग्रामीणों का गुस्सा भडक़ गया और उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी की।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिला उपायुक्त के आदेश के बावजूद भी पुलिस प्रशासन उनका सहयोग नही कर रहा है। अगर कल सुबह तक पुलिस प्रशासन ने इस मामले में उनका सहयोग नही किया तो वे स्वयं इस विवादित ज़मीन पर कब्ज़ा ले लेंगे।
ग्रामीणों का उग्र रूप होते देख मधुबन थाना प्रभारी जगदीश मौर मौके पर पहुंचे और उन्होंने मौके पर एकत्रित ग्रामीणों को बताया कि पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण आज पर कार्रवाई नही की जा सकी और आप सभी ग्रामीणों की पूरी बातचीत को पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा दिया जाएगा


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