इन्द्री 11 जून सुरेश अनेजा
ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को प्रतिवर्ष गंगा दशहरे का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व के मौके पर हजारों की संख्या में श्रधालु पहुंचकर गंगा में डुबकी लगाते हैं तथा अपनी मनोकामना पूरी होने की दुआ मांगते हैं। इस दिन को लोग बहुत शुभ मानते हैं। लोगों की मान्यता है कि इस दिन माता गंगा ने धरती पर अवतार लिया था। इसी खुशी में यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व पर हजारों की संख्या में दूर दूर से आकर गंगा की पूजा अर्चना कर स्नान करते हैं और अपने पापों का नाश करते हैं। इस अवसर को कुछ जिलों में यमुना दशहरे के रूप में मनाया जाता है और लोग यमुना में स्नान कर खुद को कृतार्थ करते है। लोगों में यह मान्यता भी हैं कि इस दिन तीनों नदियों गंगा,यमुना और सरस्वती में स्नान करने पर मनोकामना पूरी होती है। लोगों की इस पर्व में बहुत आस्था है। कई स्थानों पर इस दिन मेले भी लगते हैं।
हर साल की तरह इस साल भी लोग यमुना के नगली घाट पर पहुंचे तथा यमुना में डुबकी लगाई। हांलाकि पिछले कई सालों से ज्येष्ठ माह में यमुना में पानी नही आ रहा था जिस कारण लोगों को निराशा होती थी ओर उन्हें बिना स्नान किये वापिस लौटना पड़ता था। लेकिन इस बार लोगों को यमुना में काफी पानी देखने को मिला। जिससे खुश होकर लोग घंटो यमुना में स्नान करते रहे। इस अवसर पर नगली घाट पर मेला भी लगा जिसमें काफ ी दुकाने लगाई गई। इनमें खरबूजों की विशेष दुकाने भी लगी हुई थी। लोगों ने खरबूजों की व्यापक स्तर पर खरीददारी भी की। इस अवसर पर पहुंचे श्रधालुओं नफे सिंह,अली हसन,सतीश,विनोद और सतपाल का कहना है कि लोगों कि इस यमुना दशहरे के पर्व में काफी आस्था है। हर साल लोग यमुना में डुबकी लगाने के लिए यहां पहुंचते हैं। इस साल यमुना में पानी आने से लोग काफी खुश हैं ओर यमुना में स्नान कर खुद को कृतार्थ कर रहे हैं।

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