करनाल,विजय कम्बोज
काला धन और भ्रष्टाचार को लेकर सत्याग्रह पर अड़े बाबा रामदेव और सरकार के बीच सुलह को लेकर बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई। इसके बाद बाबा रामदेव रामलीला मैदान रवाना हो गए। सूत्रों के अनुसार बाबा सरकार के रवैये से खुश नहीं है। वार्ता के बाद केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि इतनी जल्दी इसके परिणाम की उम्मीद करना नासमझी है।
गौरतलब है कि रामदेव ने शुक्रवार को यह दावा भी किया कि उनका आदोलन न तो राजनीति से प्रेरित या सांप्रदायिक है। इससे पहले एक जून को मध्य प्रदेश से यहा पहुंचने पर बाबा की अगवानी हवाईअड्डे पर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी समेत सरकार के चार मंत्रियों ने की थी और बाबा को मनाने के लिए उनसे बातचीत की। यहा रामलीला मैदान में कल से शुरू होने वाले सत्याग्रह में शामिल होने के लिए आए 5000 से अधिक लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए रामदेव ने कहा कि उनका आदोलन राष्ट्रहित में किया जा रहा है और किसी राजनीतिक दल द्वारा प्रायोजित नहीं है। योगगुरु ने कहा कि हमारा सत्याग्रह किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हम तटस्थ हैं। कोई पार्टी या संगठन आदोलन को प्रायोजित नहीं कर रहा और सभी जाति धर्म के लोग हमारे साथ जुड़ रहे हैं। हम सभी पार्टियों से हमारे साथ जुड़ने का अनुरोध करते हैं। हम एक विशेष मंच तैयार कर रहे हैं जिसमें सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि आकर अपना विचार रख सकते हैं।
कुछ लोगों की आलोचना पर जवाब देते हुए रामदेव ने कहा कि मैं योग की सीमा पार नहीं कर रहा हूं। झूठ नहीं बोलना और चोरी नहीं करना भी योग का हिस्सा है और मैं उन लोगों को सीमा में वापस लाने का प्रयास कर रहा हूं जिन्होंने सीमा पार कर दी है।
रामदेव ने अपने आदोलन का मकसद गाधीवादी अन्ना हजारे के अनशन को कमजोर करने संबंधी खबरों की पृष्ठभूमि में कहा, 'हम किसी को नीचा नहीं दिखाना चाहते या किसी को हराना नहीं चाहते।'
रामदेव ने दावा किया कि उनके आदोलन का मकसद विदेशों में जमा 400 लाख करोड़ रुपये के कालाधन को वापस देश में लाना और भ्रष्ट व्यवस्था में बदलाव करना है। उन्होंने कहा कि सारे राजनेता, व्यापारी और अधिकारी भ्रष्ट नहीं हैं लेकिन उनमें से जो भ्रष्ट हैं उन्होंने जनता के धन को लूटकर काला साम्राज्य बना लिया है।
देश में हसन अली और ए. राजा जैसे अनेक भ्रष्ट लोग होने का दावा करते हुए योगगुरू ने कहा कि रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के रावण को मारा जाएगा। उन्होंने कहा कि कल से देश के 624 गावों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सत्याग्रह शुरू होगा।
रामदेव ने कहा, 'मैं केवल तीन दिन के लिए नहीं बल्कि 30 दिन तक अनशन करने के लिए तैयार हूं क्योंकि हम देश में भूखे मर रहे लोगों के लिए ऐसा कर रहे हैं।' उन्होंने एक कानून की माग की जिसमें सरकारी अधिकारी किसी आम आदमी का काम समयबद्ध तरीके से करें और ऐसा नहीं करने पर उन पर जुर्माना लगाया जाए। बार बार नहीं करने पर उन्हें निलंबित कर दिया जाए।
बाबा ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग एक हद तक असफल रहे हैं इसलिए हमें इन मुद्दों को उठाना पड़ा है। उन्होंने रिश्वतखोरी के मामलों के लिए फास्टट्रैक अदालतों की भी माग की और कहा कि भ्रष्ट तरीके से करोड़ों रुपये लूटने वालों को उम्रकैद या मौत की सजा दी जानी चाहिए।
इस बीच, योग और सत्याग्रह में भाग लेने के लिए देशभर से लोगों का हुजूम रामलीला मैदान में उमड़ने लगा है। योगगुरू बाबा रामदेव के कल से शुरू होने वाले अष्टाग योग शिविर और सत्याग्रह के लिए देशभर से भगवा झडे और पोस्टर लिए लोगों का सैलाब ऐतिहासिक रामलीला मैदान में उमड़ने लगा है। आयोजन स्थल पर किसी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
बाबा के योग और अनशन में शामिल होने के लिए दिल्ली समेत देश के अनेक हिस्सों से युवाओं के साथ साथ बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी बोरिया बिस्तर लेकर उत्साह के साथ आयोजन स्थल पर डेरा जमा रहे हैं। रामलीला मैदान में लोगों के पंजीकरण के लिए हर प्रदेश का अलग काउंटर लगाया गया है, जहा सत्याग्रह में शामिल होने वाले लोगों को पहचान पत्र दिए जा रहे हैं।
एक तरफ जहा बाबा को मनाने के लिए सरकार की ओर से पूरी कोशिश हो रही है वहीं एक एक पल की खबर के लिए मीडियाकर्मियों का हुजूम भी जमा हुआ है। आयोजन स्थल पर चारों और भगवा और सफेद झडे तथा योगगुरू के पोस्टर लगे हुए हैं। रामलीला मैदान में विशालकाय मंच के पास बड़े स्क्रीन भी लगाए गए हैं|मंच के सामने के स्थान को लोगों को बैठने के लिए तीन हिस्सों में बाटा गया है। एक में वो लोग बैठेंगे जो एक दिन अनशन पर बैठेंगे यानी सत्याग्रह में शामिल होंगे। विशालकाय पंडाल का एक हिस्सा पूरे समय अनशन पर बैठने वालों के लिए है और तीसरा भाग आम लोगों के लिए है जो समारोह में मौजूदगी से अपना समर्थन जताने आएंगे।यहा सुबह साढे़ पाच बजे से सात बजे तक अष्टाग योग कराया जाएगा और शेष दिन लोग बाबा के सत्याग्रह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।आयोजन स्थल पर पाच हजार पंखें और कूलर लगाए गए हैं और 1300 अस्थाई शौचालय तथा बाथरुम बनाए जा रहे हैं।वरिष्ठ मंत्रियों ने रद्द की अपनी यात्रा -बाबा रामदेव के कल से [शनिवार से] शुरू हो रहे अनशन से पहले उनसे महत्वपूर्ण बातचीत के लिए केंद्र सरकार के कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने शुक्रवार को अपनी तय यात्राओं को रद्द कर दिया। इनमें वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भी शामिल हैं।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुखर्जी ने बाबा रामदेव को अनशन नहीं करने के लिए मनाने के लिहाज से उनसे बातचीत के लिए कोलकाता की अपनी यात्रा रद्द कर दी। कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली का भी मंगलोर जाने का कार्यक्रम था लेकिन उन्होंने भी वार्ता के चलते उसे निरस्त कर दिया।काले धन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्याग्रह करने की घोषणा करने वाले रामदेव को मनाने के लिए सरकार की तरफ से प्रयास जारी हैं। दरअसल सरकार नहीं चाहती कि देश में फिर से दो महीने पहले के हालात बनें जब अन्ना हजारे ने जंतर मंतर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन किया था और हजारों लोग उनके समर्थन में सड़क पर उतर आए थे। तब सरकार को अन्ना की मागें माननी पड़ी थीं। रामदेव के करीबी सहयोगियों ने कहा कि यदि सरकार सभी मागें मान भी लेती है तब भी सत्याग्रह कम से कम तीन दिन चलेगा।
रामदेव को हर हालत में रोकेगी सरकार
-बाबा रामदेव का अनशन रोकने के लिए सरकार शुक्रवार को विदेश से काला धन वापस लाने के समयबद्ध उपायों का एलान कर सकती है। काला धन वापस लाने के लिए कार्यबल गठित करने और भ्रष्टाचार के संबंध में उठाए गए कदमों और रामदेव के दूसरे मुद्दों पर भी सरकार आकर्षक प्रस्तावों के साथ बाबा को मनाने का निर्णायक प्रयास करेगी। तीन वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री सरकार के फार्मूले का मसौदा लेकर शुक्रवार को रामदेव से मिलेंगे।
कई फार्मूलों के साथ सरकार बाबा को मनाने और दबाव में लेने के लिए हर तरह से कोशिश कर रही है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि योग गुरु कुछ दबाव में तो आए हैं, लेकिन सरकार से कह दिया है कि वह कोई ऐसा रास्ता बताए जिससे उनका भी सम्मान बना रहे। एक सूरत यह भी बन रही है कि मसला न सुलझने की स्थिति में सरकार उन्हें अनशन से रोकने के लिए कानून का सहारा भी ले सकती है। संकेत साफ हैं कि रामदेव को अनशन से रोकने के लिए सरकार किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।अगर सहमति न बनी तो सरकार उन्हें अनशन से रोकने के लिए कानून का सहारा भी ले सकती है। सूत्रों का कहना है कि रामदेव ने यहां पर 4 जून से 20 दिन का योग शिविर चलाने की अनुमति मांगी है न कि अनशन की। इस आधार पर गृह मंत्रालय सीधे दिल्ली पुलिस को कार्रवाई के लिए कह सकता है।दरअसल, सिविल सोसाइटी में फूट डालने की कोशिशों का दांव सरकार को उल्टा पड़ गया है। अभूतपूर्व स्वागत और सरकारी तवज्जो से बाबा तो पसीजे नहीं, उल्टे समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी उन्हें समर्थन देकर सरकार का टेंशन बढ़ा दिया। सरकार बेहिचक मान रही कि बाबा का अनशन अगर शुरू हुआ तो राजधानी में भीड़ संभालना मुश्किल होगा। वहीं, लोकपाल विधेयक पर सरकार के रुख से चोट खाई टीम अन्ना भी बाबा के साथ खुलकर खड़ी हो गई है। इन हालात के मद्देनजर पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट, फिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस की कोर कमेटी और आखिर में प्रणब मुखर्जी के साथ नॉर्थ ब्लाक में कपिल सिब्बल, पवन बंसल और सुबोधकांत सहाय देर रात तक इस मसले की काट ढूढ़ते रहे।
बंसल ने बाद में कहा भी कि 'रामदेव जी भी काला धन वापस लाने पर गंभीर हैं और सरकार भी तो मुद्दे को सुलटाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।' गुरुवार को दोपहर में बाबा रामदेव से कनॉट प्लेस में उनके पुराने मित्र सुबोधकांत सहाय ने मुलाकात की। इसके बाद रामदेव की प्रेसवार्ता भी सरकार ने बातचीत को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर स्थगित करवा दी।
प्रणब का एयरपोर्ट जाना कांग्रसियों को भी खला
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी सरीखे वरिष्ठ नेता का योग गुरु रामदेव को मनाने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर जाना कांग्रेसियों को भी नहीं सुहाया है। गुरुवार को कुछ वरिष्ठ कांग्रेसियों ने उनसे शिकायत भी कर दी-'प्रणब दा कम से कम आपको एयरपोर्ट नहीं जाना चाहिए था।'योग गुरु के आगे तकरीबन दंडवत की मुद्रा में आई केंद्र सरकार ने बुधवार को उन्हें किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष जैसा सम्मान दे दिया था। वित्ता मंत्री प्रणब मुखर्जी, कपिल सिब्बल और पवन बंसल को बाबा रामदेव की अगवानी करने नई दिल्ली एयरपोर्ट भेज दिया। कई वरिष्ठ कांग्रेसी इसे फजीहत मान रहे हैं, क्षुब्ध हैं। लिहाजा उन्होंने गुरुवार को यह मुद्दा वित्ता मंत्री प्रणब मुखर्जी के सामने उठा दिया। दर्द तो प्रणब मुखर्जी का भी छलक आया, लेकिन वह सिर्फ इतना ही कह पाए-'क्या करता, मैं भी मजबूर था।' उनका इशारा 7-रेसकोर्स की ओर था।
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