Thursday, June 2, 2011

सरकार रामदेव से कर रही पर्दे के पीछे बात


करनाल,सुरेश अनेजा  
बाबा रामदेव को अनशन पर नहीं जाने के बारे में मनाने के लिए सरकार ने गुरुवार से पर्दे के पीछे की कोशिशें शुरू कर दीं। अन्ना हजारे के अनशन के दौरान सड़कों पर हुए प्रदर्शन जैसे हालात रोकने के लिए कांग्रेस ने भी उच्च स्तरीय विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों के बीच गंभीर चर्चा जारी रहने के तब संकेत मिले जब योगगुरु ने शाम के समय रामलीला मैदान पर होने वाले संवाददाता सम्मेलन को निरस्त कर दिया। गौरतलब है कि रामदेव ने चार जून से अनशन पर जाने का ऐलान किया है।
संवाददाता सम्मेलन यह कारण बताते हुए निरस्त किया गया है कि सरकार के साथ 'गंभीर बातचीत' जारी है और दूसरे दौर की बातचीत होने के बाद वह कल मीडिया को 'निष्कर्ष' के बारे में बताएंगे।
सामाजिक कार्यकर्ताओं में लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर मतभेद होने की खबरों के बीच अन्ना हजारे ने आज घोषणा की कि वह भी रविवार को रामदेव के अनशन में शामिल होंगे। हालांकि, गांधीवादी ने योगगुरु को आगाह किया कि सरकार झूठे वादे कर 'दगाबाजी' कर सकती है।
उधर, कांग्रेस कोर समूह की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर बैठक हुई, जिसमें पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और प्रणव मुखर्जी, पी. चिदंबरम और ए के एंटनी जैसे केंद्रीय मंत्री तथा वरिष्ठ नेता अहमद पटेल मौजूद थे। कांग्रेस वरिष्ठ मंत्रियों के रामदेव से बातचीत करने हवाई अड्डे जाने की घटना से कल सहमत नहीं थी। उसने इस मुद्दे से उचित तरीके से निपटने का जिम्मा सरकार पर छोड़ दिया है। कोर समूह की बैठक के बाद एक  उच्च् स्तरीय बैठक हुई, जिसमें मुखर्जी सहित केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, पवन कुमार बंसल, सुबोध कांत सहाय, एंटनी, चिदंबरम और एम वीरप्पा मोइली ने भाग लिया। बैठक में कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर और गृह सचिव जी के पिल्लै भी शामिल हुए। सिब्बल, बंसल और सहाय ने कल रामदेव से हवाईअड्डे पर मुलाकात की थी।
कांग्रेस ने अपने नेताओं पर इस मुद्दे पर बेवजह बयान देने पर रोक लगा दी है। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रामदेव को आडे़ हाथ लेते हुए कहा था कि वह संन्यासी कम, व्यापारी ज्यादा हैं।
रामदेव के करीबी सूत्रों ने कहा कि योगगुरु ने मंत्रियों के समक्ष जो मुद्दे उठाए थे उन पर एक निश्चित समयबद्धता के साथ काम करने को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत जारी है।
ये मुद्दे विदेशों में जमा काले धन को लाने के संबंध में एक अध्यादेश जारी करने की सरकार द्वारा प्रतिबद्धता जताने से जुड़े हैं। रामदेव चाहते हैं कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाए। रामदेव ने भ्रष्टाचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए फास्ट ट्रेक अदालतों का गठन करने, भ्रष्टाचारियों के लिए अधिकतम मौत की सजा का प्रावधान करने और सार्वजनिक वितरण सुविधा की गारंटी के लिए कानून बनाने के मुद्दे भी सरकार के समक्ष उठाए हैं।
सरकार क्या करना चाहती है, इसे लेकर अब तक कोई आधिकारिक वक्तव्य नहीं आया है लेकिन इस तरह के संकेत हैं कि सरकार रामदेव को मना लेगी और यह सुनिश्चित कराने के लिए सभी कोशिशें करेगी कि योगगुरु अनशन पर नहीं जाएं।
हजारे ने रालेगन सिद्धी में कहा कि जो भी लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं, उन्हें सरकार के मौखिक आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए।
गांधीवादी ने दिल्ली में रामदेव से मुलाकात करने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी सहित चार वरिष्ठ मंत्रियों को हवाई अड्डे भेजने की सरकार की असाधारण कोशिशों की आलोचना की।
हजारे ने कहा, 'इतने सारे मंत्रियों को जाने की जरूरत नहीं थी। बातचीत करने के लिए एक या दो मंत्री पर्याप्त होते। जब इतने सारे मंत्री जाते हैं तो इसके ए मायने हैं कि दगाबाजी का इरादा था। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना और वादे करना, सब कुछ समय काटने के लिए है।'
कालेधन के मुद्दे पर बाबा रामदेव के सत्याग्रह में शामिल होने के लिए दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान पर लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। आयोजन स्थल पर पांच हजार पंखें और कूलर, 1300 अस्थाई शौचालय तथा बाथरुम बनाए जा रहे हैं। रामदेव समेत योगगुरुओं के लिए मंच के अलावा, विशाल स्क्रीन, पुलिस नियंत्रण कक्ष, मीडिया कक्ष, खोया पाया विभाग भी बनाया जा रहा है।
उधर, लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने रामदेव के प्रस्तावित आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि वह भी पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर विदेशी बैंकों के खाताधारकों की सूची जारी करने की मांग कर चुके है।
वहीं, इंदौर में बालीवुड अभिनेता शाहरूख खान ने कहा कि बाबा रामदेव का प्रस्तावित अनशन राजनीति से प्रेरित है और वह इस आंदोलन का समर्थन नहीं करेंगे।

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