Sunday, July 10, 2011

मारकण्डा नदी के पानी ने कुरुक्षेत्र में मचाई तबाही सरकार के दावो की पोल खोली


कुरुक्षेत्र प्रदीप आर्य
मारकण्डा नदी के पानी ने कुरुक्षेत्र के कई गांवों को अपनी चपेट में लेकर जिला प्रशासन के बाढ से बचाव के लिए किये गये दावों की पोल खोल दी है। मारकण्डा नदी में आया यह पानी यहां हुई बरसात का है ऐसा नहीं है। यह पानी काला आ ब से छोड़ा गया है। जिस कारण मारकण्डा नदी इस समय पूरे उफान पर है। नदी के इस पानी ने गांव मुगलमाजरा, गुमटी, मलिकपुर, रावा, कलसाना, झरौली कलां, झांसा, रोहटी, ठसका मीरांजी, डेरा मोह मद शाह, खेड़ी शहीदां, च मू, इस्माईलाबाद आदि तथा नदी के साथ लगते गांवों की लगभग 1100-1200 एकड़ जमीन को अपनी चपेट में ले लिया है। इस एरिया की फसलें तबाह हो गई हैं।


मारकण्डा नदी में पानी आने के कारण पहले भी इस क्षेत्र में पानी खड़ा रहा था। एक बार फिर पानी आने से इलाके के लोगों में जहां परेशानी बढ रही है वहीं प्रशासन व सरकार के प्रति भी नाराजगी बढती जा रही है। किसानों के सामने पशुओं के चारे की समस्या पैदा हो गई है। लगातार पानी के रहने से गांवो की बिजली सप्लाई बन्द कर दी गई है। अगर ये यूं ही चलता रहा तो किसानों को और कई तरह की समस्याओं से झूझना पड़ेगा। 
क्या है समस्या**********  काला आ ब से ही लेकर मारकण्डा नदी के दोनों किनारे बांध बनाये गये हैं लेकिन ठसका मीरांजी के पास आकर एक किमी0 के क्षेत्र में बांध नहीं बनाया गया। जिस कारण मारकण्डा नदी में आया हुआ अधिक खेतों और डेरों को अपनी चपेट में ले लेता है। पिछले लगभग तीस सालों से यह समस्या बनी हुई है। प्रशासन व सरकार के यहां गुहार लगाते हैं तो आश्वासन तो मिलते हैं पर समाधान कोई नहीं मिलती। एक ग्रामीण जोगा सिंह का कहना है कि हर साल पानी आने के कारण सडक़े टूट जाती हैं। आने जाने की समस्या खड़ी होने से बच्चों की पढाई में भी रुकावट आती है। और अब तो हालात ये हैं कि हमारे यहां कोई रिश्ता करने को भी तैयार नहीं होता।



क्या है समाधान -:******  ग्रामिणों का कहना है कि यदि यहां पर बांध हो तो यह पानी नदी के रास्ते जाकर गुहला के पास से जा रही घघ्घर नदी में जा सकता है। झांसा, रोहटी, ठसका मीरांजी, डेरा मोहमद शाह, खेड़ी शहीदां, च मू, इस्माईलाबाद आदि के कई गांवों की यह समस्या बांध बनने से ही समाप्त हो सकती है। स्थायी समाधान के लिए यह बांध बनना जरुरी है। हमारे विधायक अब स्वयं सिंचाई व वित्त मन्त्री भी हैं, उन्हीं से ही हमें उ मीद है कि वे बांध बनवाकर अपने हल्कावासियों को स्थायी समाधान देंगें।




क्या कहता है प्रशासन -:*********************  कुरूक्षेत्र के जिला राजस्व अधिकारी और आपदा राहत प्रबंधन अधिकारी अशोक मलिक ने बताया कि इस बार बाढ का पानी गांवों और शहरों में अपना असर ना दिखाए इसके  लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। लेकिन मारकण्डा नदी में काला आ ब से छोडे गये इस पानी से प्रभावित झांसा, रोहटी, ठसका मीरांजी, डेरा मोहमद शाह, खेड़ी शहीदां, च मू, इस्माईलाबाद आदि गांवों का दौरा किया गया। ऐसी अवस्था में इसका तात्कालिक उपाय कोई नहीं है, प्रशासन इस समय राशन-पानी, भोजन चारा आदि आवश्यक वस्तुएं भिजवा सकता है। कुछ पाइप भी भेजे गये हैं। लेकिन पानी अपनी गति से स्वयं ही उतर जायेगा। इसका स्थायी समाधान बांध बनाना ही है। 

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