Saturday, July 2, 2011

सीवरेज की सफाई का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है


रादौर,2 जुलाई:कुलदीप सैनी 
 बरसात के मौसम में स्थानीय लोगों को गंदे पानी की निकासी की कोई समस्या न हो इसके लिए जलापूर्ति विभाग द्वारा सीवरेज व्यवस्था को दरूस्त करने के लिए कमर कस ली गई है। जिसके तहत सीवरेज की सफाई का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इस सफाई अभियान के तहत पिछले तीन दिनों में विभाग द्वारा लगभग 30 प्रतिशत का कार्य पूरा कर लिया गया है। विभाग का दावा है कि बरसात के सीजन के पूर्णत: शुरू होने से पहले सीवरेज की सफाई का कार्य पूरा कर दिया जाएगा। 


जलापूर्ति विभाग के एसडीओं एसपी सैनी ने बताया कि सफाई का यह कार्य पूरे कस्बे में करवाया जाएगा। ताकि लोगों को बरसात के दिनों में गंदे पानी की निकासी की समस्या न झेलनी पड़े। अक्सर बरसात से पहले अगर सीवरेज की सफाई न करवाई जाए तो सीवरेज बरसात के समय ब्लॉक हो जाते है। जिससे कई जगह बरसात का पानी जमा हो जाता है। जो लोगों के लिए एक गंभीर समस्या बन जाता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह निर्णय लिया है कि समय से पहले सीवरेज की सफाई का कार्य पूरा करवा लिया जाए। जिसके लिए सीवरेज के ठेेकेदार को निर्देश दिए गए थे। जिस पर ठेकेदार ने कार्य तुंरत शुरू करवाकर सफाई अभियान चालू कर दिया है। जल्द की पूरे कस्बे के सीवरेजों की सफाई कर दी जाएगी। मेनहॉलों को अच्छी तरह से साफ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए विभाग पूरा प्रयास कर रहा है।  इस अवसर पर मोहन ठेकेदार, मदनलाल, रमेशचन्द्र वर्क सुपरवाईजर  आदि उपस्थित थे। 


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 कांग्रेस राज में क्षेत्रवाद की राजनीति के चलते कार्य करवाए जा रहे है।
रादौर,2जुलाई:
 इनैलो पार्टी में युवाओं का पूरा मान सम्मान किया जाता है। जिस कारण आज युवा वर्ग अधिक से अधिक संख्या में इनैलों पार्टी के साथ जूड रहा है। इनैलों पार्टी में युवाओं की  संख्या लगातार बढ़ रही है। जिससे पार्टी को मजबूती मिल रही है। यह शब्द युवा इनैलों के ब्लॉक सहसचिव विजय चमरोड़ी ने कहे। विजय चमरोड़ी शनिवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।युवा इनैलों नेता विजय चमरोड़ी ने कहा कि कांग्रेस जब से सत्ता में आई है तब से प्रदेश विकास की दृष्टि से पिछड़ चुका है। कांग्रेस राज में क्षेत्रवाद की राजनीति के चलते कार्य करवाए जा रहे है। जिससे उतरी हरियाणा के लोगों का कांग्रेस सरकार लगातार शोषण कर रही है। युवाओं को भी नौकरियों में भेदभाव की राजनीति से गुजरना पड़ रहा है। कांग्रेस सरकार की इस भेदभाव की नीति को युवाओं ने भली भांति समझ लिया है। जिस कारण आज युवा वर्ग भारी संख्या में इनैलों पार्टी के साथ जुडक़र पार्टी को मजबूती दे रहा है। आने वाले समय में युवाओं का यह रूझान कांग्रेस पार्टी को मुंहतोड़ जवाब देगा। आगामी चुनावों में चौ० ओमप्रकाश चौटाला की सरकार बनेगी। तब प्रदेश से क्षेत्रवाद को  पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। इस अवसर पर यशपाल चमरोड़ी, आनंद, भूपेन्द्र, बलवंत, राजेश, प्रमोद, प्रदीप व रींकू आदि उपस्थित थे। 
फोटो 2 - रादौर मे पत्रकारो से बातचीत करते युवा इनैलों नेता विजय चमरोड़ी।
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यमुना नदी में कटाव जरी किसान परेशान,प्रशासन मौन 
रादौर   ,2जुलाई:कुलदीप सैनी 
 यमुनानदी के  लालछप्पर व गुमथला घाटों पर भूमि कटाव होना शुरू हो गया है। फिलहाल यह कटाव मध्यम गति से हो रहा है। लेकिन अगर यही स्थिति रही तो भूमि कटाव का दृश्य गत वर्ष से भी भयंकर होगा। किनारों पर हो रहे भूमि कटाव को लेकर किसान चिंता में है। किसानों ने भूमि कटाव को देखते हुए पापुलर को भी काटना शुरू कर दिया है। लेकिन प्रशासन का इस ओर अभी तक कोई ध्यान नहीं है। बाढ़ बचाव के नाम पर जो कार्य किए गए है वो कटाव को रोकने में असमर्थ दिखाई दे रहे है।  वहीं बागवाली व उन्हेंडी घाट बाढ़ की दृष्टि से अधिक संवेदनशील दिखाई दे रहे है। क्योंकि बाढ़ बचाव के नाम पर इन दोनों घाटों पर कोई कार्य नहीं किया गया है। जिस कारण यह घाट रेत के किनारों के भरोसे ही है। 


समय से पहले हो रही भारी बारिश से बढ़ रही है ग्रामीणों की चिंताएं-यमुना से सटे गांवों के ग्रामीणों को इस बार बाढ़ के कारण भयंकर तबाही का अंदेशा लगा हुआ है। ग्रामीण संजय राणा सरपंच उन्हेंडी, नरेश सैनी, वीरभान वधवा व सतनाम ङ्क्षसह ने बताया कि हर वर्ष अगस्त व सिंतबर माह के बाद यमुनानदी में पानी आता था। लेकिन इस बार भारी बारिश के कारण यमुनानदी में लगभग एक से डेढ़ माह पहले ही पानी आना शुरू हो गया है। जिसे देखकर लगता है कि इस बार यमुनानदी की बाढ़ गत  वर्ष के रिकॉर्ड भी तोड़ेगी। 
शुरू हो चुका है कटाव-यमुनानदी में आए पानी के बाद यमुना के किनारों पर कटाव जारी हो चुका है। लालछप्पर, गुमथला व बागवाली के किनारों पर कटाव होने से किसान चिंता में दिखाई दे रहे है। पिछले वर्ष भी कटाव के कारण लोगों को अपनी बेशकीमती जमीनों से हाथ धोना पड़ा था। लेकिन प्रशासन से इस स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। ग्रामीणों का मानना है कि इस बार जमीनों के साथ साथ उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। क्योंकि कटाव की स्थिति में यमुना इस वर्ष आबादी क्षेत्रों तक मार करेगी। 


बागवाली व उन्हेंडी है अधिक संवेदनशील-सितंबर 2010 में आई भयंकर बाढ़ ने उन्हेंडी व बागवाली घाटों के किनारों को भी खोखला कर दिया था। जिस कारण अब किनारें रेत की ढाल में तबदील हो गये है। जिन्हें देखकर बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब यमुना की बाढ़ के आगे ये किनारें किस कदर ग्रामीणों को सुरक्षा दे पायेगें। जिस कारण इन गांवों के किनारें बाढ़ की दृष्टि से अधिक संवेदशील माने जा रहे है। जहां पर यमुनानदी अधिक तबाही मचा सकती है। 


बाढ़ बचाव कार्य कटाव रोकने में हो रहे है असफल-प्रशासन द्वारा लाखों रूपया खर्च करने के बाद किनारों पर जो बाढ़ बचाव कार्य करवाए गए है उन्हें देखकर किसान व ग्रामीण संतुष्ट नहीं है। ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साध कर मामले की पूरी जानकारी देने में लगे हुए है। लेकिन ग्रामीणों को कुछ भी हाथ लगता नहीं दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ बचाव के लिए जिस तरह से कार्य करवाया गया है उससे किनारों पर हो रहे कटाव को नहीं रोका जा सकता। इसलिए तो यमुना के किनारें पहले पानी की मार ही नहीं झेल पा रहे है। किनारों पर लगातार कटाव धीरे धीरे कटाव होना जारी है। अगर अब भी प्रशासन ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए तो परिणाम भयानक होगें। 


पापुलर को काट रहे है किसान-कटाव के डर से यमुना के मुहाने पर स्थित किसानों ने अपने खेतों से पापुलर के पेड़ों को काटना शुरू कर दिया है। क्योंकि गत वर्ष जब कटाव हुआ था तो किसानों को जमीन के साथ साथ अपनी गन्नें, चेरी व धान की फसल के अलावा पापुलर के पेड़ो को भी गवा दिया था। जिसे देखकर इस बार किसान पहले से ही सर्तक हो रहे है। 


कटाव को रोकने के लिए किए जाए उपाय- किसान सुरेश कुमार, बलबीर सिंह,  वीरभान, नरेश कुमार, सतनाम सिंह ने कहा कि प्रशासन जल्द से जल्द कटाव रोकने का उपाय करे। ताकि बाढ़ की तबाही से आबादी क्षेत्रों को बचाया जा सके। उन्होंने जिला उपायुक्त अशोक सांगवान से मांग की है कि भूमि के कटाव को रोकने के लिए जल्द से जल्द उपाय किए जाए। ताकि ग्रामीण चिंतामुक्त हो सके। 

-  रादौर क्षेत्र के बागवाली व लालछप्पर घाट पर हो रहा भूमि कटाव।    

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