Monday, July 11, 2011

असंध में मनरेगा के तहत 36 लाख 49 हजार रूपये विकास कार्य करवाए :आर.के.सिंह

असंध दीपक पांचाल 
       महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम  (मनरेगा) के  अन्तर्गत चालू वित्त वर्ष के दौरान गत माह तक असंध उपमंडल के विभिन्न गांवों में 36 लाख 49 हजार रूपये की राशि के विकास कार्य करवाए जा चुके है और इस राशि में से एक हजार 555 बेरोजगार व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाकर 18 हजार 980 दिन का कार्य दिया गया।
        यह जानकारी असंध के उपमंडलाधीश आर.के.सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस अवधि में उपमंडल के  4 हजार 167 परिवारों के 9 हजार 707 बेरोजगार व्यक्तियों ने मनरेगा के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया जिनमें से 1103 परिवारों ने जॉब कार्ड के लिए आवेदन किया। ग्राम पंचायतों द्वारा सभी आवेदकों के जॉब कार्ड बनवाए गए हैं। उन्होंने बताया कि उपरोक्त पंजीकृत परिवारों में से 6 परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अब तक 100 दिन का रोजगार प्राप्त कर लिया है। मनरेगा के तहत प्राप्त धन राशि में से सिंचाई विभाग द्वारा  गांव जलमाना, कबूलपूर, पधाना, फफडाना, रंगरूटी खेडा, मर्दान खेडा, कौल खेडा, झिमरी खेडा, अरडाना में कार्य करवाये गये हैं। इसी प्रकार लोकनिर्माण विभाग द्वारा गांव जलमाना, ठरी, जबाला, जयसिंहपुरा, डुपेडी व फफड़ाना में कार्य करवाया जा रहा है।
         उन्होंने बताया कि मनरेगा के सही क्रियान्यवन  एवं पंचायती राज के जन-प्रतिनिधि को योजना की  विस्तार से  जानकारी  देने के लिए हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेडी द्वारा मार्गदर्शिका नामक एक पुस्तक का प्रकाशन किया गया है, जोकि ग्राम पंचयतों को उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानि मनरेगा योजना के तहत कोई भी महिला व पुरूष  रोजगार के लिये आवेदन कर सकता है। हर बेरोजगार व्यक्ति को एक वर्ष में 100 दिन का रोजगार अवश्य देने का प्रावधान है। यदि जॉब कार्ड बनने के उपरांत आवेदक द्वारा सरपंच से काम मांगने के 15 दिन के अन्दर काम नहीं मिलता तो ऐसी स्थिति में सरपंच द्वारा उसे बेरोजगारी भत्ता देना पड़ेगा क्योंकि अधिनियम के तहत  रोजगार प्राप्त करना उसका अधिकार है। उन्होंने बताया कि एक जनवरी 2011 के बाद मनरेगा के तहत अब अकुशल मजदूर को 179 रुपये, अद्र्धकुशल मजदूर को 183 रूपये, कुशल मजदूर को 188 तथा  अत्याधिक कुशल मजदूर को 198 रूपये  प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती है जो कि देश में सर्वाधिक है। 
        उपमंडलाधीश ने बताया कि केन्द्र सरकार ने ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिये अनेक योजनाओं को समायोजित करके मनरेगा योजना में विकास कार्यो के लिये अनुदान राशि प्रदान करवाई जा रही है। इस योजना में अब कृषि व उद्यान विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं व फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मनरेगा योजना में 5 एकड़ से कम जमीन वाले कृषक अपने खेत में कांग्रेस घास को उखाडऩे, घर से गोबर व कूड़ा-करकट को खेत में पहुंचाने, सिंचाई के लिये खाल बनाने व उनको पक्का करवाने, फसलों की खुदाई व नुलाई इत्यादि कार्य की मजदूरी मनरेगा योजना के तहत प्राप्त कर सकते हैं।
        श्री सिंह ने कहा कि इस अधिनियम के लागू होने से जहां बेरोजगार लोगों को उनके घर-द्वार पर ही रोजगार उपलब्ध होगा वहीं ग्रामीण विकास की गति भी तेज होगी। ग्रामीण विकास की गति को तेज करवाने में पंचायती राज संस्था के जन-प्रतिनिधि अहम भूमिका निभा सकते हैं।  मनरेगा के तहत अब गांव को साफ-सुथरा व निर्मल बना सकते हैं।
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ओवरलोडिड वाहनों के चलान किये जाएगे

 दीपक पांचाल 
        उपमंडलाधीश असंध आर.के.सिंह  ने मिट्टी, मलबा व भवन निर्माण जैसी सामग्री को लेकर चलने वाले  वाहनों चालकों को आगाह करते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने व ओवरलोडिड वाहनों के चलान किये जाएगे।
         उन्होंने बताया कि मिटटी, रेत, बजरी जैसी भवन निर्माण सामग्री और मकानों से निकलने वाले मलबे को अधिक भार में लादकर चलने वाले वाहन कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।  मिट्टी व रेत सडक़ों पर गिरने से धूल उठती है व पर्यावरण दूषित होता है तथा सडक़ों पर की गई सफाई भी प्रभावित होती है। ऐसा करने वाले वाहनों को रोककर सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण व पुलिस कर्मियों के माध्यम से चालान किये जायेंगे।
        उपमंडलाधीश  ने उपरोक्त सामग्री लेकर चलने वाले मालिकों से कहा है कि वाहनों में उतना सामान लादे, जितना जायज है। मिट्टी, मलबा व रेत लेकर चलने वाले ट्रक व ट्रेक्टर ट्रालियां आवेरलोडिड होकर सडक़ों पर सामग्री को गिराकर  चलते रहते हैं। इस समस्या पर काबू पाने के लिये अब ऐसे वाहनों के चालान किये जाने का निर्णय लिया गया है।

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