Friday, April 15, 2011

17 अप्रैल से आठ दिवसीय मेला प्रारभ

लाडवा
कस्बे के प्राचीन माता बाला सुंदरी मंदिर में 17 अप्रैल से आठ दिवसीय मेला प्रारभ होगा। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर में यह मेला हर वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से प्रारंभ होकर बैसाख कृष्ण पक्ष की सप्तमी को संपन्न होता है। इस वर्ष लगने वाले मेले के लिए प्रशासन व सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं तैयारी में जुटी हुई है। इस ऐतिहासिक मंदिर में माता की पवित्र पिंडी के दर्शनों को प्राथमिकता दी जाती है, जिसको महाराजा अजीत सिंह ने स्वयं नंगे पांव त्रिलोक पुर(हिमाचल प्रदेश) से सिर पर लाकर यहां स्थापित किया था। मंदिर में माता बाला सुंदरी की पिंडी के साथ-साथ माता बाला सुंदरी की भव्य प्रतिमा, शिव परिवार, हनुमान जी, भगवान नर सिंह, भगवान भैरो बली, महाकाली, ध्यानू भक्त, गणेश जी, माता दुर्गा की प्रतिमा के साथ-साथ माता के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की प्रतिमा भी स्थापित है। श्रद्धालुओं का मानना है कि जो भी सच्चे दिल से मन्नत मांगता है, देवी माता उसकी इच्छा अवश्य पूरी करती है। चैत्र शुक्ल पक्ष की चौदस वाले दिन इस मंदिर की ज्यादा महानता है। हर वर्ष यहां पर इलाके के साथ-साथ पास के लगते प्रदेश उत्तर प्रदेश, पंजाब हिमाचल आदि से भी लाखों की संख्या में भक्तजन देवी माता के दर्शनों के लिए आते है। मंदिर के रख-रखाव के लिए राजा अजीत सिंह द्वारा चार व्यक्ति कन्ना, भगवाना, कृपा व छज्जाू को रखा था, जिसके वंशज आज भी मंदिर की देखरेख कर रहे हैं। मेले में खजला मिठाई लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती है। मेले में झूले, मौत का कुआं, सर्कस, नौटंकी, दंगल आदि का आयोजन भी किया जाता है। हर वर्ष मेले में कई लाख श्रद्धालु माता के दरबार में मत्था टेकते हैं।

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