Friday, April 15, 2011

AJAB GAJAB GINDAGI

AJAB GAJAB GINDAGI


मेरा अपना नाम, भीड़ से हटकर मेरी पहचान

मेरी अपनी इज्जत, शोहरत और शान,

कुछ लोगो का यह मोह उनकी असल जिंदगी होती,

मालिक (इश्वर) उनपर हँसता, जिंदगी रोती ,

इस ख्वाहिश में इंसान, कठिन से कठिन काम करता,

और तो और कभी-कभी अजब गजब कारनामे कर डालता,

वह जी तोड़ मेहनत करता, मुश्किल से मुश्किल काम करता,

हर पल शोहरत को, अपने दामन में समेटने को बेचैन रहता,

जब कि वह जनता है कि

उसकी यह इज्जत जन पहचान और शान सब व्यर्थ है,

फिर भी वो इन राहों पर चलता है, कहता है कर्त्तव्य है,

बस इसी जूनून में जिए चला जाता है,

बस इसी जूनून में जिए चला जाता है,

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