अंबाला
छावनी के रामबाग रोड पर अशर्फी बाग इलाका है। यहां गोशाला कमेटी की जमीन है, जिसकी लीज जगदीश चंद्र बंसल के नाम है। बंसल बताते हैं कि उन्होंने 1985 में यह जमीन लीज पर ली थी। उस समय यहां शिवलिंग स्थापित था और पूजा करने के लिए छोटी सी मढ़ी बनी हुई थी। लेकिन लोगों की भावनाओं को देखते हुए उन्होंने यहां पर मंदिर का निर्माण करवा दिया। इसके लिए बाकायदा नौ बाई छह के कमरे का निर्माण करवाया गया। मंदिर की छत पर लेंटर भी दिया गया। लोग विभिन्न उत्सव, त्यौहार आदि के दौरान मंदिर में समय-समय पर पूजा-अर्चना के लिए आते भी रहे।
बंसल के अनुसार वह हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहते हैं। कभी-कभार मंदिर आते हैं। शनिवार को जब वह यहां आए तो मंदिर टूटा पड़ा था। छत गायब थी, दीवारें हटा दी गई। गेट भी गायब था। लेकिन, सबसे अधिक हैरानी तो इस बात की हुई कि मंदिर की जगह को और अधिक बढ़ाते हुए यहां पर निर्माण कार्य भी चल रहा था। हालांकि, यहां पर कोई भी मजदूर व मिस्त्री उन्हें नहीं मिला, लेकिन मौके पर की गई शेटरिंग, यहां पर चिनाई के लिए उतारी गई ईटें आदि भी पड़ी हुई मिली। बंसल के मुताबिक जब उन्होंने पास-पड़ोस के लोगों से इस बारे में पूछा तो किसी के पास भी कोई जवाब नहीं था। मंदिर को नुकसान किसने पहुंचाया और कौन यहां पर चिनाई करवा रहा है, यह बताने वाला कोई भी नहीं था। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसी को लिखित में शिकायत दे दी गई। साथ पुलिस को मामले की जानकारी देते हुए मामला दर्ज करने की मांग की गई। वहीं, शाम तक इस सिलसिले में मामला दर्ज नहीं किया गया था, लेकिन मंदिर को तोड़े जाने का रोष लोगों में बना हुआ था।
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