नई दिल्ली
केंद्रीय दूरसंचार राज्य मंत्री सचिन पायलट ने कहा है कि नक्सली हिंसा से ग्रसित इलाकों जैसे संकटग्रस्त क्षेत्रों में फोन संपर्क सुनिश्चित कराने के लिए सरकार ने एक नई योजना के तहत थानों में दूरसंचार टावर लगाने का प्रस्ताव किया है। पायलट ने कहा कि हमें हर हाल में संपर्क सुनिश्चित कराना चाहिए, क्योंकि लोगों को आज की दूरसंचार क्रांति का हर हाल में हिस्सा होना चाहिए। यह दूरसंचार क्रांति केवल मुंबई, दिल्ली, चेन्नई तक सीमित नहीं रखी जा सकती। इसे गांवों में भी जाना है, उन लोगों तक जो बेहद कमजोर है।
पायलट ने कहा कि उन्होंने सरकार के पास मौजूद 13,789 करोड़ रुपये के कोष के एक हिस्से को सार्वभौमिक दूरसंचार सेवाओं के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव किया है।
पायलट के अनुसार, यदि निजी कंपनियां इस तरह के इलाकों में जाने के प्रति उदासीन रहती है, क्योंकि वहां उन्हे कोई लाभ नहीं है, तो यह सरकार संचालित भारत संचार निगम लिमिटेड [बीएसएनएल] की जिम्मेदारी बनती है कि वह इन इलाकों में फोन संपर्क मुहैया कराए।
पायलट ने कहा कि मैंने बीएसएनएल से कहा है कि उसे उन जिलों में पहुंचना चाहिए, जो नक्सली हिंसा से ग्रस्त है, उन्हे अन्य प्रभावित इलाकों में भी जाना चाहिए। हमारा जोर इस बात पर है कि बीएसएनएल उन इलाकों में अधिक टावर लगाए, क्योंकि नक्सली टावरों को उड़ा देते है और वे इलाके अलग-थलग पड़े रहते है।
पायलट ने कहा कि यद्यपि भारतीय दूरसंचार की पहुंच 70 प्रतिशत हो गई है, लेकिन शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच अभी तक काफी फासला बना हुआ है। शहरी इलाकों में दूरसंचार पहुंच 154 फीसदी है तो ग्रामीण इलाकों में मात्र 33 प्रतिशत।
पायलट ने कहा कि हमारे पास 80 करोड़ दूरसंचार ग्राहक है। लेकिन वे ऐसे लोग है जिन्हे आसानी से संपर्क किया जा सकता है। जहां तक बाकी के 40 करोड़ लोगों का सवाल है, वे ऐसे लोग है जो भौगोलिक रूप से दूर है या वे आर्थिक एवं सामाजिक रूप से समाज में हाशिए पर है।
राजस्थान की अजमेर लोकसभा सीट का दो बार से प्रतिनिधित्व कर रहे पायलट ने कहा कि सरकार और उद्योग जगत को चाहिए वे ऐसे लोगों को दूरसंचार सेवाएं सुलभ कराए और वृद्धि का अवसर मुहैया कराए।

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