प्रदीप आर्य कुरुक्षेत्र
एक बार फिर मिली मिड डे मील में बनी खीर में छिपकली
एडीसी की सिफारिश को दरकिनार किया था सरकार ने
हरियाणा सरकार के मिड डे मील होटल प्रबंधन संस्थान के विशेषज्ञों की देख-रेख में तैयार करवाने का निर्णय भी संदेह के घेरे में आ गया है। ताजा घटनाक्रम में लाड़वा ब्लाक के गांव छपरा में वितरित किये जाने वाले मिड डे मील में बनी खीर में छिपकली मिली है। बच्चों में खीर बाँटने से पहले विज्ञान अध्यापक राजेश कुमार ने चैक करने के लिए खीर खाई तो उन्हें गर्मी महसूस हुई तथा चक्कर आने लगे। एक दो उल्टी भी लगी। संयोग से बच्चों का चैकअप करने आये डॉ0 ने तुरन्त स्थिति को संभाल लिया। लेकिन इसे गर्मी का असर मान लिया गया था।
बच्चों को खीर वितरित करना आरम्भ किया तो छिपकली दिखाई पड़ी। बांटने का काम तुरन्त रोक दिया और उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया।
काबिलेगौर है कि हरियाणा सरकार ने पिछले दिनों हुई घटना के बाद निर्णय लिया था कि मिड डे मील की निगरानी के लिए ज्योतिसर के निकट स्थापित होटल प्रबंधन संस्थान के वरिष्ठ शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी और उनकी देख-रेख में ही खाना तैयार व पैक होगा। उल्लेखनीय है कि कुरुक्षेत्र जिले के आधा दर्जन से अधिक स्कूलों में विषाक्त मिड डे मील खाने से लगभग सवा सौ बच्चे बीमार पड़ गए थे और उसके बाद इसकी जांच का काम एडीसी सुमेधा कटारिया को सौंपा गया था। एडीसी ने जांच के दौरान शिक्षकों के साथ बैठक करके फीडबैक लिया था। अधिकतर शिक्षकों ने सुझाव दिया था कि मिड डे मील को जिला के एक ही स्थान पर तैयार करने की बजाए ब्लॉक स्तर पर तैयार किया जाए तथा समय पर पहुंचाया जाए क्योंकि खाना पहुंचाने मे 6 से 7 घंटे लगने पर खाना खराब होने की संभावना बनी रहती है।
गौरतलब है कि सरकार द्वारा इस संबंध में आगामी निर्णय लिए जाने तक प्रशासन ने इस्कॉन द्वारा मिड डे मील तैयार करने पर पाबंदी लगा दी थी। एडीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में मिड डे मील ब्लॉक स्तर पर तैयार करने की सिफारिश की थी लेकिन सरकार ने फिलहाल इस सिफारिश को दरकिनार कर जिला में एक ही स्थान पर मिड डे मील तैयार करवाने का निर्णय लिया है।
सवाल उठते है कि क्या मीनू बदलने से छिपकली या अन्य कीट पतंगो का गिरना रुक जायेगा? दिन में 11 बजे के करीब बंटने वाला मिड डे मील रात को लगभग 2 बजे बनना आर भ होता था क्या उस पर विराम लगेगा? क्या स्थानीय प्रशासन की जांच मात्र अभिभावको में उत्पन्न रोष को शांत करने का बहाना था? यदि अभिभावक भी चाहें तो मिड डे मील बांटे जाने से पहले जांच कर सकेंगे यह निर्णय लेकर उन्हें खुश करने का प्रयास नहीं है। यदि अभिभावकों की भावना का याल रखती तो स्थानीय प्रशासन द्वारा मिड डे मील ब्लाक स्तर पर बनाने के निर्णय पर मुहर लगाती। विषाक्त भोजन खाने से जो बच्चे बीमार हुए थे उसकी जवाबदेही सुनिश्चित कर उसे उसकी लापरवाही की सजा दी जाती ताकि यह गलती बार बार न दोहराई जाए। इसे प्रशासन की संवेदनहीनता कहें या फिर राजनैतिक दबाव आखिर ईमानदार होने का द भ भरने वाला प्रशासन क्यों चुप है?

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