रादौर,कुलदीप सैनी
गाव बरहेड़ी में दो कनाल विवादित पंचायती भूमि पर न्यायालय से स्टे मिलने के बावजूद बृहस्पतिवार को श्री गुरू रविदास मंदिर सभा बरहेड़ी की ओर से संत समागम का आयोजन कराया गया। इस कारण गाव में तनाव की स्थिति बनी रही। प्रशासन की ओर से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल डीएसपी अशोक सभ्रवाल के नेतृत्व में विवादित स्थल पर तैनात किया गया। वहीं, एसडीएम देवेन्द्र कौशिक , नायब तहसीलदार रादौर राजबीर¨सह सुर्जेवाला, बीडीपीओ कंवरभान नरवाल, पंचायत अधिकारी अंग्रेज¨सह मोर, पंचायत सचिव बाबूराम घेसपुर मौके पर उपस्थित रहे। ढाई बजे दोपहर संत समागम खत्म होने पर प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सास ली। संत समागम में पहुंचे डेरा बाबा लालदास कपालमोचन के मंहत रामदयाल व संत फकीरदास बेगमपुर तंदवाली का दलित समुदाय के लोगों ने कार्यक्रम में पहुंचने पर स्वागत किया। समागम में मौजूद दलित श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद चखा। नहीं लगने दी रविदास की मूर्ति
गाव बरहेड़ी के विवादित स्थल पर रविदास जी का मंदिर बनाने को अड़े गाव के दलितों व प्रशासनिक अधिकारियों की बुधवार की रात को थाना जठलाना में लंबी बैठक चली। इसमें प्रशासन के अधिकारियों ने दलित समुदाय के लोगों को विवादित स्थल पर मूर्ति स्थापित न करने की अपील की। बाद में विवादित स्थल पर केवल संत समागम व सत्संग करने की प्रशासन ने दलित समुदाय के लोगों को अनुमति दी।
राजनीति चमकाने पहुंचे नेता
विवादित स्थल पर संत समागम के दौरान कुछ बसपा व काग्रेस पार्टी के नेता मंडराते देखे गए। जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए इधर उधर घूम रहे थे। लेकिन, किसी ने भी ऐसे नेताओं को ज्यादा भाव नहीं दिया। बाद में ये नेता प्रशासन के पास जाकर मामले को सुलझाने के लिए अपना सहयोग देने की दुहाई देते दिखाई दिए। यह था मामला
पिछले 19 फरवरी को गाव बरहेड़ी के हरिचंद पंच, जयराम नम्बरदार, रणजीत, सुरेश, रींकू, राजू, भूपेन्द्र इत्यादि ने गाव के दलित समुदाय के लोगों के साथ मिलकर दो कनाल पंचायती भूमि पर जबरन रविदास मंदिर का निर्माण करने की कोशिश की। इस दौरान दलित समुदाय के लोगों ने विवादित भूमि पर मंदिर का झडा गाड़कर उपरोक्त भूमि पर मंदिर बनाने की कोशिश की। इस पर बरहेड़ी गाव की पंचायत ने उपरोक्त लोगों के खिलाफ न्यायालय में पंचायती भूमि पर कब्जा करने की कोशिश करने का मामला दायर किया। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद उपरोक्त भूमि पर स्थगन आदेश जारी किए। लेकिन, बृहस्पतिवार को स्थगन आदेश के बावजूद दलित समुदाय के लोगों द्वारा विवादित स्थल पर संत समागम आयोजित करने से मामला गरमा गया। इस मामले की सुनवाई के लिए न्यायालय में 11 अप्रैल की तिथि निर्धारित हुई है।
No comments:
Post a Comment