दिल्ली
लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनी संयुक्त समिति के सह अध्यक्ष और पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने शनिवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि लोकपाल विधेयक संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पारित होगा। गांधीवादी नेता और समाज सुधारक अन्ना हजारे के 97 घंटे तक चले अनशन और जनआंदोलन के बाद सरकार ने शनिवार को लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए 10 सदस्यीय समिति के गठन की अधिसूचना जारी की।
समिति में सरकार और नागरिक समाज के पांच-पांच प्रतिनिधि शामिल होंगे। अन्ना हजारे की ओर से समिति में हजारे के अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े, शांति भूषण, सूचना अधिकार कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल और प्रख्यात वकील प्रशांत भूषण शामिल है।
सरकार द्वारा अन्ना हजारे की मांगें मंजूर किए जाने के बाद शांति भूषण ने कहा कि लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार होने के बाद यह संसद के दोनों सदनों में पेश होगा। मुझे उम्मीद है कि यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित होगा।
भूषण ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि सरकार लोकपाल विधेयक को पारित करना चाहती है क्योंकि आखिरकार सरकार ऐसा कानून लागू करना चाहती है जो जनता की इच्छा के अनुरूप हो। क्योंकि ऐसा कानून बनाने के बाद ही सरकार को चुनावी लाभ मिलेगा और कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी है जो कि जनता की नब्ज पहचानती है।
सामाजिक कार्यकर्ता भूषण [85 वर्ष] ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि 10 सदस्यीय समिति भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बेहद सख्त कानून का मसौदा बनाएगी। उन्होंने कहा कि लोकपाल संस्था को प्रभावी बनाने के लिए इसे स्वतंत्र रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम किसी भी नजरिए का स्वागत करते है लेकिन यह स्वतंत्र हो और इसे भ्रष्टाचार की किसी भी शिकायत की जांच करने का अधिकार हो क्योंकि यह भारत के लोगों की इच्छा है। उन्होंने कहा कि समाज का हर वर्ग रिश्वतखोरी से चिंतित है फिर चाहे वह छोटे स्तर की हो या 2जी स्पेक्ट्रम जैसे बड़े घोटाले।
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