Saturday, May 7, 2011

कन्याभ्रूण हत्या समाज पर एक कलंक है:सुमिता सिंह

इन्द्री 7 मई सुरेश अनेजा
हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष एवं करनाल शहर विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती सुमिता सिंह ने आज कहा कि कन्याभ्रूण हत्या समाज पर एक कलंक है और इस जघन्य अपराध के चलते गत कई वर्षो से लडक़ों के मुकाबले लड़कियों की संख्या कम होती जा रही है, यदि ऐसा ही रहा तो भविष्य में  अधिक असमानता और अपराधों की संख्या बढऩे की आशंका है। विधायक आज सूचना जन सम्पर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के तत्वाधान में एक मई से 15 मई के बीच, कन्याभ्रूण हत्या की रोकथाम के लिये चलाए जा रहे विशेष प्रचार अभियान में गांव बलड़ी के उच्च विद्यालय में महिलाओं, स्कूली बच्चों व ग्रामीण बच्चों को सम्बोधित कर रही थी। इस गांव में गत वर्ष एक हजार लडक़ों के पीछे लड़कियों की संख्या केवल 801 थी। उन्होंने इस बात पर चिन्ता जताई की कन्याभ्रूण हत्या और लड़कियों का कम होना शहरी व शिक्षित वर्ग में अधिक है जबकि ग्रामीण लोग दो बच्चे व लडक़ा-लडक़ी एक समान की सोच लेकर जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी जो लोग ये समझते हैं कि लडक़ा बड़ा होकर वंश चलायेगा वे मुगालते में है। वास्तव में लडक़ा बड़ा होकर मां-बाप के सपनों पर खरा नहीं उतरता और उनके दुख दर्द को नहीं समझता। उन्होंने उदहारण देते हुए कहा कि वे स्वयं रोज ऐसे बुजुर्गो से रू-ब-रू होती हैं जिनके 4-4 लडक़े होते हुए भी परिवार से अकेले रहते हैं और पैंशन के लिये मेरे पास  आते हैं। उन्होंने कहा कि लड़कियां आज किसी भी क्षेत्र में लडक़ों से कम नहीं है। सीमा पर रक्षा, पुलिस बल, हवाई जहाज उड़ाना, रेल व मोटर की ड्राईविंग, डाक्टर, इंजीनियर, शिक्षक सभी क्षेत्रों में महिलाएं पुरूषों की बराबरी कर रही हैं। दूसरी ओर परीक्षा परिणामों में लड़कियां हर वर्ष लडक़ों से अव्वल रहती हैं। फिर भी लोग कन्या को लडक़ों से दोयम मानते हैं जबकि विदेशों में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की महायोद्धा महारानी लक्ष्मीबाई, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक कल्पना चावला भी महिलाएं थी जिन्होंने इस देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया और अब अनेक महिला खिलाड़ी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित कर रही हैं। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि वे लड़कियों को खूब पढ़ाए, लडक़ी जब शिक्षित होगी वह अपना और जिस घर जायेगी उसका उद्धार करेगी। लडक़े व लड़कियों में कोई फर्क नहीं है। उन्होंने स्कूल में उपस्थित विद्यार्थियों से कहा कि वे अधिक से अधिक शिक्षित बने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े और कन्याभ्रूण जैसी बुराई के खिलाफ गांवों के रूढीवादी महिला व पुरूषों को समझाएं। उन्होंने ये भी कहा कि गांव में एक सभा कर बुजुर्गो को समझाएं आपस में चर्चा करें और जो लोग कन्याभ्रूण हत्या जैसा घृणित कार्य करते हैं उसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। विधायक ने ग्रामीणों को संदेश दिया कि वे एक तरफ तो कन्याओं की पूजा करते हैं और दूसरी तरफ उन्हें जन्म से पहले मरवाने का कार्य करते हैं यह महापाप है। लड़कियों के सम्मान के लिये हरियाणा सरकार ने अनेक योजनाएं लागू कर रखी है इनमें लाडली पैंशन योजना के तहत केवल दो लड़कियां पैदा होने पर महिला व पुरूष दोनों में से किसी एक की आयु 45 वर्ष होने पर 500 रुपये प्रतिमाह पैंशन दी जाती है। तकनीकी शिक्षा में महिलाओं के लिये 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखी गई है। प्रदेश में लड़कियों के लिये नि:शुल्क शिक्षा व वजीफा दिया जा रहा है। इसके पश्चात सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के कलाकारों ने उच्च विद्यालय में एक लघु नाटिका कमला प्रस्तुत कर कन्याभ्रूण हत्या की रोकथाम का संदेश दिया। आज के कार्यक्रम में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी उदय प्रताप सिंह, डी.आई.पी.आर.ओ., खंड शिक्षा अधिकारी मोहन लाल वर्मा, मुख्याध्यापक विनोद शर्मा, अध्यापक गुरप्रीत सिंह, गांव के पूर्व सरपंच हरीराम व गुरदयाल सिंह, नम्बरदार महेन्द्र सिंह व कर्म सिंह तथा महिला पंच सुलोचना व ओमपती भी उपस्थित थी।

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