Thursday, June 16, 2011

जज का कर्तव्य ऐसा होता है जो गुनहगार की परख करके उसे दंड देता है:प्रीतम पाल सिंह


करनाल विजय काम्बोज
हरियाणा के लोकायुक्त तथा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रीतम पाल सिंह ने कहा कि जज समाज का मॉडल रूप होता है जो अपने विवेक से गलत और सही को आईने के रूप में जनता के सामने लाता है। वे आज हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन परिसर में एच.सी.एस. ज्यूडिशियल ब्रांच के अधिकारियों की 15 दिन प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारम्भ पर बोल रहे थे। उन्होंने नव-नियुक्त जजों के साथ अपने अनुभव सांझा करते हुए कहा कि जज एक ऐसी कलम होती है जो किसी के जीवन को बर्बाद व आबाद कर सकती है परन्तु जज का कर्तव्य ऐसा होता है जो गुनहगार की परख करके उसे दंड देता है। उन्होंने कहा इसके लिये जज को आत्मविश्वासी, विवेकशील, निर्भीक व ईमानदार होकर निर्णय करने की जरूरत है। जज को न्याय की गरिमा को बनाए रखना चाहिये। उन्होंने कहा कि हो सके तो केस का निर्णय सुनवाई होने के तुरंत बाद दें यदि ऐसा नहीं होता तो अगले दिन केस का निर्णय देना अच्छे न्यायाधीश का प्रतीक है। इससे जनता के सामने जज की ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा झलकती है।

उन्होंने कहा जज को सही निर्णय देने के लिये ध्यानपूर्वक दलील व अपील सुननी चाहिये उसके बाद निर्णय के लिये अपनी अन्र्तात्मा का सहयोग लेना चाहिये तभी सही निर्णय हो सकता है। जज का निर्णय समयबद्ध हो उसमें स्वार्थ की बू न आये। उन्होंने कहा जज का विचार उच्च होना चाहिये यदि विचार उच्च होगा तो कर्म भी उच्च होगा जो व्यावहारिक जीवन में किसी को लाभ पहुंचाने के काम आयेगा। लोकायुक्त श्री प्रीतम पाल सिंह ने कहा कि जज का जीवन समाज में साधु की तरह होता है परन्तु आज ज्यूडिशियरी में भी कुछ स्वार्थी लोग आ गये हैं इन पर अंकुश लगाने के लिये अकाऊंटेबिलटी एक्ट लाया जा रहा है जो कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ शिकंजा कसेगा। उन्होंने कहा अब भी भ्रष्ट जजों पर नकेल डालने के लिये ज्यूडिशियल विजीलेंस काम कर रही है जो कि दोषी जज की जांच करके अपना निर्णय देती है। उन्होंने माना कि जांच के बाद कई दोषी जजों को सजा दी जा चुकी है। लोकायुक्त ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों व प्रधानमंत्री के पदों को लोकपाल बिल में शामिल करने से पहले इस पर चर्चा होनी जरूरी है। उन्होंने कहा ज्यूडिशियल पर नकेल डालने के लिये पहले ही संविधान की धारा 124 के तहत प्रावधान किया गया है। इस धारा के तहत सुप्रीम कोर्ट तक के जजों की जांच की जा सकती है। यह प्रशिक्षण 16 जून से 30 जून तक चलेगा। इस प्रशिक्षण में भाग ले रहे 28 नव-नियुक्त जजों ने अपना परिचय दिया। इस प्रशिक्षण में उनको पुलिस की कार्य-प्रणाली, शस्त्र, फोरेंसिक विज्ञान, अपराध न्याय व्यवस्था-वर्तमान एवं भविष्य, प्रत्यार्पण प्रक्रिया, सामुदायिक पुलिसिंग जैसे पेशवर विषयों के साथ व्यक्तित्व-विकास के लिये संवेदीकरण, तनाव प्रबंधन आदि विषयों पर शैक्षणिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जायेगी। आज के कार्यक्रम में एच.ए.पी. के निदेशक सुधीर चौधरी ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। कोर्स डायरेक्टर अतिरिक्त पुलिस महा-निरीक्षक सुमन मंजरी ने आए हुए अतिथियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर उपायुक्त श्रीमती नीलम प्रदीप कासनी, पुलिस अधीक्षक राकेश आर्य, न्यायवादी एच.ए.पी. एस.के.शर्मा सहित विभिन्न अधिकारी उपस्थित थे। 

No comments:

Post a Comment