Thursday, May 5, 2011

पोषक तत्वों की जानकारी दी

रादौर, कुलदीप सैनी 
आस्था शिक्षण महाविद्यालय के ग्रीन फोरेस्ट इको क्लब के विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र दामला में भ्रमण कराया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के संयोजक डॉ. ओमप्रकाश मेहला, डॉ नरेंद्र गोयल, डॉ रणबीर सिंह और डॉक्टर प्रेमलता ने कृषि विज्ञान से संबंधित जानकारियां विद्यार्थियों को दी। कृषि विज्ञान से संबंधित जानकारी देते हुए डॉ नरेंद्र गोयल ने कहा कि जिस प्रकार स्वस्थ रहने के लिए हमें तरह- तरह के पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है उसी प्रकार पौधों की बढ़ोतरी के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की सही मात्रा आवश्यक होती है। उन्होंने मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढाने, आवश्यक उर्वरकों का प्रयोग, फसल द्वारा अवशोषित किए और पोषक तत्वों के बारे में बहुमूल्य जानकारी विद्यार्थियों को दी। डॉ. मेहला ने बताया कि हम किस तरह से कृषि को अपना व्यवसाय बना सक ते है। इस अवसर पर डॉ रणबीर सिंह ने विद्यार्थियों को खुम्ब की विभिन्न किस्मों के बारे में जानकारी दी। डॉक्टर प्रेमलता ने विद्यार्थियों को भीषण गर्मी से बचाव के उपाय भी बताए। उन्होंने बताया कि गर्मी से बचने के लिए हमें नीबू, ककड़ी, खीरा, तरबूज आदि का सेवन करना चाहिये। इस अवसर पर आस्था शिक्षण महाविद्यालय के प्रार्चाय पवन शर्मा ने चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार से आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में ग्रीन फोरेस्ट इको क्लब के संयोजक पपींद्र कुमार, प्रवक्ता रूचि जैन, संदीप शर्मा, विजय मलिक आदि उपस्थित थे। 


रादौर,
किसानों को  भूमि कि  उर्वरता शक्ति से आने वाली दिक्कतों का  सामना अब नहीं करना पड़ेगा। जिसका  बीड़ा कृषि विभाग ने उठाया है। विभाग अब किसानों कि  भूमि का  परीक्षण कर भूमि कि कमियों के  बारे उन्हें अवगत कराएगा। जिससे किसान उन्हें आसानी से दूर कर सकेगें।  इससे फसलों कि  उत्पादन क्षमता को  बढ़ाने में मदद मिलेगी। भूमि की कमियों को  जांच लेने के  बाद किसानों का  रसायनिक  खादों पर आने वाला खर्च भी कम हो जाएगा और साथ ही उत्पादन क्षमता भी बढेगी।
 रसायनिक  खादों पर खर्च होगा कम-खंड कृषि  अधिकारी विजेन्द्र सिंह  मलिक  ने बताया कि  भूमि का  परीक्षण करवाने के  बाद किसानों का  रसायनिक  खादों पर आने वाला खर्चा कम हो जाएगा। भूमि परीक्षण के  बाद किसानों को  उतना ही खाद डालने कि  सलाह दी जाएगी, जितना कि  भूमि के  लिए आवश्यक  है। उन्होंने बताया कि  अक्सर किसान अनजाने में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के  लिए अत्याधिक  रसायनिक  खादों का  प्रयोग करता है। जिससे उसे न केवल आर्थिक  नुकसान भी होता है बल्कि  उत्पादन क्षमता पर भी इसका  विपरीत प्रभाव पड़ता है। लेकिन भूमि परीक्षण के  बाद किसान भूमि की  कमी के  अनुसार ही   आवश्यक  तत्त्व भूमि में डालकर लाभ उठा सकते है।
31मई तक  किसान निशुल्क  करवा सकते है भूमि परीक्षण कृषि  ने
अधिकारी विजेन्द्र सिंह  मलिक  ने बताया कि  भूमि का  निशुल्क  परीक्षण विभाग कि  ओर से 31 मई तक  निशुल्क  करवाया जा रहा है। जो किसान भूमि का  परीक्षण करवाना चाहता है उसके  बारे में विभाग को  आवेदन कर सकते है। जिसके  बाद विभाग की टीम किसान की भूमि का  परीक्षण कर भूमि की  क्षमता के  बारे में अवगत करवाएंगी।

ढेंचा लगाकर भी बढ़ा सकते है उर्वरक  शक्ति-भूमि की  उर्वरक  शक्ति को  बढ़ाने के  लिए कृषि  विभाग द्वारा किसानों को  90 प्रतिशत सब्सीडी पर ढेंचा उपलब्ध करवाया जा रहा है। किसान ढेंचा अपने खेत में ढेंचा लगा कर उससे भूमि की उर्वरक शक्ति को  बढ़ा सकते है। ढेंचा उगाने से हरी खाद बनती है। जो भूमि की  उर्वरकता के  लिए लाभदायक  सिद्ध होता है।




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