करनाल विजय कम्बोज
हरियाणा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जवाहर इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत चालु वित्त वर्ष में 150 करोड़ रूपए की बजट राशि खर्च की जाएगी। इस राशि से प्रदेश में 10 अंध विद्यालय, 6 मंद बुद्धि विद्यालय, 2 मानसिक विक्षिप्तता हेतु आजीवन गृह, 4 वरिष्ठ माध्यमिक गृह, 8 मूक एवं बधिर विद्यालय, 3 राज्य स्तरीय संस्थान तथा सभी प्रकार की विकलांगता हेतु व्यवसायिक शिक्षा प्रशिक्षण केन्द्र एवं बाल गृह खोले जाऐंगे। यह जानकारी उपायुक्त नीलम प्रदीप कासनी ने आज स्थानीय चमन गार्डन क्षेत्र में संचालित विकलांग प्रशिक्षण शिशु केन्द्र के भ्रमण के दौरान दी। इसके अतिरिक्त प्रदेश में मानसिक रूप से विकसित मंदबुद्धि बच्चों के पुर्नवास हेतु घरौंदा नामक योजना शुरू की गई है। मूक एवं बधिर, अस्थि बाधित, मानसिक विकसित व बहु विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए केयर गिवर्स का विस्तार नामक योजना शुरू की गई है। प्रदेश में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा वर्तमान में 9 मूक एवं बधिर तथा 23 मंदबुद्धि विद्यालय खोले गए है।
उन्होंने इस केन्द्र में रह रहे अशक्त बच्चों को देखकर कहा कि ऐसे बच्चों के भविष्य में रोशनी लाने के लिए आम आदमी व संस्थाओं को सहयोग करने के लिए आगे आना चाहिए ताकि ऐसे बच्चो का जीवन आसान हो सके। जैसे ही उपायुक्त विकलांग प्रशिक्षण केन्द्र में पहुंची तो वहां पर रह रहे विकलांग बच्चों ने अपनी-अपनी भाषा में उनका स्वागत किया। उपायुक्त ने इन बच्चों को देखकर अपनी संवेदना प्रकट की और प्रशिक्षण की संचालिका डा0 सुजाता के इस समाज सेवा के कार्य की सराहना भी की। उपायुक्त ने प्रशिक्षण केन्द्र में व्यक्तिगत रूप से जाकर बच्चों का हाल-चाल जाना और इन बच्चों को प्रशिक्षण दे रही शिक्षिकाओं से बातचीत की। इस प्रशिक्षण केन्द्र में बच्चों के मनोबल को बढ़ाने व इन बच्चों को व्यस्त रखने के लिए पेटिंग,सिलाई-कढ़ाई, अक्षर ज्ञान, कम्पयुटर ज्ञान, पार्लर का कार्य, मोमबती व लिफाफे बनाना आदि कार्य सिखाया जाता है। इस प्रशिक्षण केन्द्र में करीब 200 नेत्रहीन, मूक एवं बधिर व दिमागी रूप से कमजोर बच्चे हैं। इन बच्चों में से करीब 40 बच्चे केन्द्र में ही स्थाई रूप से रहते है जिनमें से 12 अनाथ भी है।
उपायुक्त ने कहा कि कुदरत ने इन बच्चों को जैसा बनाया है उसके बीच में कोई भी व्यक्ति कुछ फेर-बदल नहीं कर सकता। परन्तु आम दानी सज्जन इन बच्चों को अपना समझ कर इन्हें प्यार दे ताकि इन्हें समाज में सुविधाजनक जीवन जीने का दर्जा मिल सके। उन्होंने इन बच्चों के लिए उपकार का कार्य कर रही इस संस्था के सहयोग के लिए दानी सज्जनों से अपील की है कि वे बच्चों के भविष्य के लिए अपना आर्थिक सहयोग जरूर दे। प्रशिक्षण केन्द्र की संचालिका डा0 सुजाता ने बताया कि विकलांग बच्चों के सहयोग के लिए उनकी आत्मिक सेवा भावना से जुड़ी हुई है। वह इस केन्द्र को चलाने के लिए हर सम्भव प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि यह केन्द्र पिछले 20 वर्षो से चलाया जा रहा है, इस समय इस केन्द्र में करीब 200 बच्चे है जिनमें से 40 बच्चों को आवासीय सुविधा दी गई है जिन्हें तीनों समय का भोजन आदि दिया जाता है। इस केन्द्र के लिए 32 कर्मचारियों को लगाया गया है। उन्होंने उपायुक्त से कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता नाकाफी है। इन बच्चों की अच्छी देखभाल के लिए अतिरिक्त ग्रांट व अन्य आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है ताकि इन बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके। उपायुक्त ने केन्द्र संचालिका को प्रशासन की ओर से हर सम्भव प्रयास करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर जिला रैड क्रास सचिव सुनील कुमार तथा जिला बाल कल्याण अधिकारी अमरनाथ नरवाल उपस्थित थे।


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