करनाल विजय काम्बोज
प्रदेश में स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य सुधारने के उद्देश्य से स्वास्थ्य योजना विभाग द्वारा इन्दिरा बाल स्वास्थ्य योजना शुरू की गई है। इस योजना को शिक्षा विभाग के सहयोग से क्रियान्वित किया जा रहा है। इस योजना का लाभ प्रदेश के सभी सरकारी, गैर सरकारी व प्राईवेट स्कूलों के विद्यार्थियों को होगा। जिले में इस योजना के तहत गत वर्ष करीब 2 लाख स्कूली व आंगनवाड़ी केन्द्रों के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई।
सरकार द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता दिखाते हुए व उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए इन्दिरा बाल स्वास्थ्य योजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य स्वस्थ भारत का निर्माण करना है, क्योंकि जिस इमारत की नींव मजबूत होगी, वहीं इमारत आसमान की बुलंदियों को छूती है। इस योजन की शुरूआत स्कूली विद्यार्थियों से की जा रही है, इसमें स्कूली विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच, दांत, कान व रक्त की जांच, पेट के कीड़े व अन्य छोटी-छोटी बीमारियां शामिल है। इस योजना के अन्र्तगत जिन विद्यार्थियों की नजर कमजोर है, उनको इस योजना के तहत नजदीक के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में नेत्र चिकित्सक के पास परामर्श के लिए भेजा जाएगा, इसके साथ-साथ कमजोर वर्ग से संबंधित विद्यार्थियों को नि:शुल्क चश्मा भी उपलब्ध करवाया जाएगा, जिसका खर्च राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम तथा सर्वशिक्षा अभियान द्वारा वहन किया जाएगा। इन्दिरा बाल स्वास्थ्य योजना में दो आयु वर्ग बनाए गये है, जिसमें पहले वर्ग में 6 से 12 वर्ष तथा दूसरे वर्ग में 12 से 18 वर्ष के विद्यार्थी शामिल होगे। खंड स्तर पर प्राइमरी, मिडल, उच्च व सीनियर सैकेण्डरी स्कूलों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। योजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के जिला स्कूल स्वास्थ्य अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, महिला एंव बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी व सभी खंडो की महिला एंव बाल विकास अधिकरियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्रत्येक स्कूल में सभी विद्यार्थियों का अलग से स्वास्थ्य रजिस्टर तैयार करवाया गया है, जिसमें विद्यार्थियों का कद, वजन, दृष्टि सहित पूरा विवरण दर्ज किया जाता है, इस योजना के प्रथम चरण में स्कूल के अध्यापकों को स्वास्थ्य जांच करने संबंधी पूरा प्रशिक्षण भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिया जाता है।
इन्दिरा बाल स्वास्थ्य योजना के तहत सभी स्कूली छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य कार्ड तैयार करवाए गये है। इसमें 490 प्राथमिक विद्यालयों के 82 हजार 455 विद्यार्थियों में से 67 हजार 737 विद्यार्थियों के स्वास्थ्य कार्ड बना लिए गए है, इसके अतिरिक्त 262 उच्च, वरिष्ठ माध्यमिक व माध्यमिक विद्यालयों के 63 हजार 531 विद्यार्थियों में से 55 हजार 359 विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच की गई तथा जिले की 1040 आंगनवाडिय़ों के 78 हजार 513 बच्चों में से 71 हजार 782 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई । इस योजना के लिए जिला स्कूल स्वास्थ्य अधिकारी कांता धनखड़ ने बताया कि गत वर्ष करीब 591 बच्चों को मुफ्त चश्में वितरित किये गये तथा अपंग बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए ब्लॉक स्तर पर दो कैम्प लगाए गए। प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य जांच के लिए पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तय किया जाता है तथा इसकी जानकारी सभी स्कूल मुखियाओं को दे दी जाती है, ताकि स्वास्थ्य जांच वाले दिन स्कूल में सभी विद्यार्थी उपस्थित हो सकें। यदि कोई विद्यार्थी किसी प्रकार की गंभीर बीमारी से ग्रस्त पाया जाता है, तो उसके माता-पिता को भी इसकी जानकारी दी जाती है। इस प्रकार के विद्यार्थियों के लिए खंड स्तर पर अलग से सामुदायिक चिकित्सा केन्द्रों मेें शिविर लगाए जाते हैं, पोलियो से ग्रस्त विद्यार्थी की शल्य चिकित्सा के लिए उसे पीजीआई रोहतक या चंडीगढ इलाज के लिए भी भेजा जा सकेगा, जिसकी जानकारी संबंधित उपायुक्त को देनी आवश्यक होगी। इस प्रकार के बच्चों के स्वास्थ्य जांच का रजिस्टर अलग से रखा जायेगा। इस योजना के तहत यह भी व्यवस्था की गई है कि छात्राओं की स्वास्थ्य जांच महिला चिकित्सक द्वारा की जायेगी।
विकलांग छात्र-छात्राओं के लिए कृत्रिम अंग, बैसाखी, तिपहिया साईकिल, श्रवण यंत्र आदि जिला रैडक्रॉस सोसायटी तथा सर्वशिक्षा अभियान द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाएंगे। हर्नियां रोग से पीडित विद्यार्थियों का ऑपरेशन संबंधित जिला के सामान्य हस्पताल में करवाया जायेगा। स्वास्थ्य विभाग के सामुदायिक केन्द्र के अधीन आने वाले गांवो के सभी स्कूल के विद्यार्थियों का स्वास्थ्य जांच सम्बन्धित रिकार्ड वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी द्वारा तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त स्कू लों में शिक्षिकों द्वारा विद्यार्थियों को स्वास्थ्य शिक्षा, पोषाहार, शारीरिक पुष्टता व जनसंख्या आदि के बारे में भी शिक्षित किया जाएगा। इसके साथ-साथ विद्यार्थियों को जन्म/मृत्यु पंजीकरण करवाने, मातृ तथा शिशु स्वास्थ्य बारे परिवार नियोजन जैसी सामाजिक विषयों के बारे में भी शिक्षित किया जायेगा।
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