करनाल विजय काम्बोज
हरियाणा में मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए राष्ट्रीय
ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, उचित
पोषाहार, रेफरल ट्रांसपोर्ट की अतिरिक्त सुविधा, इंदिरा बाल स्वास्थ्य
योजना, खाद्य एवं औषध नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम लागू किये गये
हैं। इन कार्यक्रमों पर पर प्रदेश में चालू वित्त वर्ष में 270 करोड़ रुपये
की धनराशि खर्च की जायेगी। ये जानकारी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन
के निदेशक तथा खाद्य एवं औषध प्रशासन हरियाणा के आयुक्त डाक्टर राकेश
गुप्ता ने आज कर्ण लेक पर्यटक स्थल पर आयोजित एक प्रैस वार्ता में बोलते
हुए दी। इससे पूर्व उन्होंने स्थानीय सामान्य अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग
के इन कार्यक्रमों के सही क्रियान्वयन व प्रगति की समीक्षा की।
प्रैस वार्ता में उन्होंने बताया कि हरियाणा प्रति व्यक्ति आय,
दुग्ध उत्पादन, खाद्यान्न उत्पादन इत्यादि क्षेत्रों में देश के विभिन्न
राज्यों की तुलना में अव्वल तथा समृद्ध गिना जाता है लेकिन मातृ व शिशु
मृत्यु दर में ये प्रदेश केरल व तमिलनाडू जैसे प्रदेशों की तुलना में कहीं
ऊपर है। इस अन्तर को कम करने के लिए प्रदेश मेें कारगर उपाय शुरू किये गये
हैं ताकि हरियाणा में शिशु व मातृ मृत्यु दर को कम से कम किया जा सके।
फिलहाल प्रदेश राज्यों की तुलना में 10 से 12वें नम्बर पर है।
उन्होंने बताया कि जननी सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सरकार द्वारा
निर्णय लिया गया है कि माता के सुरक्षित प्रसव के लिए प्रदेश के सभी सरकारी
चिकित्सालयों व पी.जी.आई. रोहतक में भी सभी तरह की सुविधाएं जिसमें
दवाईयां, डायग्रोज तथा ट्रांसपोर्ट सुविधाएं नि:शुल्क प्रदान की जायेंगी।
मरीज को घर तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जायेगा। इसमें महिला के गर्भवती
होने से लेकर उसके प्रसव के 6 सप्ताह बाद तक की सुरक्षा के उपाय शामिल किये
गये हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी ग्रामीण व शहरी सरकारी अस्पताल व
स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रसव सेवाओं को नि:शुल्क किया गया है। रेफरल
ट्रांसपोर्ट के तहत वर्तमान में हरियाणा में 335 एम्बुलेंस की सेवाएं जुटाई
गई हैं। अकेले करनाल में 18 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। अब राष्ट्रीय ग्रामीण
स्वास्थ्य मिशन के तहत, वेंटीलेटर जैसी सभी सुविधाओं से युक्त एडवांस लाईव
स्पोर्ट एम्बुलेंस की सुविधा अतिरिक्त रूप से जोड़ी जा रही है ताकि घर से
अस्पताल तक जाते हुए मरीज की हालत स्थिर रखी जा सके और वह रास्ते में दम न
तोड़े। उन्होंने बताया कि इस समय प्रदेश में 6 जिलों पंचकूला, यमुनानगर,
सिरसा, रोहतक, रिवाड़ी व मेवात में एडवांस लाईव एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध
कराई गई है। जबकि 17 अन्य एम्बुलेंस खरीदी गई है और उनमें मेडिकल सुरक्षा
यंत्र फिट करवाए जा रहे हैं। आगामी सितम्बर के अंत तक सभी जिलों में उक्त
एम्बुलेंस उपलब्ध करा दी जायेंगी।
पत्रकारों द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि
हरियाणा में वर्तमान में एक लाख जन्म के पीछे 153 मातृ मृत्यु दर है जबकि
केरल जैसे प्रदेश में यह 70 से 80 तक है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार
प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को कम से कम करने के उपाय किये जा रहे हैं। इसके
लिए क्षेत्रवार शिशु मृत्यु दर के आंकडों व कारणों का पता लगाने के लिए
निगरानी तंत्र को सुदृढ़ बनाया जा रहा है जिसमें ये पता लगाया जायेगा कि
शिशु मृत्यु दर कहां कम व कहां ज्यादा है और इसके क्या कारण है। इस कार्य
में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला व बाल विकास विभाग मिलकर सहयोग करेंगे।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र यानि एन.आई.सी. का भी इसमें सहयोग लिया
जायेगा ताकि आंकडों का समुचित हिसाब रखा जा सके। उन्होंने बताया कि यदि
किसी क्षेत्र में शिशु या मातृ की मृत्यु हो जाती है तो उसकी सूचना 102 टोल
फ्री नम्बर पर सबसे पहले देने वाले व्यक्ति को 100 रुपये का ईनाम दिया
जायेगा। उन्होंने बताया कि रोहतक पी जी आई के रेजिडेंट डाक्टरों को भी
निगरानी तंत्र में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की
वेबसाइट पर भी सूचना भेजी जा सकती हैं।
मिशन डायरेक्टर ने पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में नवजात शिशु
देखभाल पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है इसके तहत प्रदेश के फरीदाबाद,
गुडगांव, यमुनानगर, अम्बाला, मेवात व कैथल जिलों में देखभाल इकाईयों की
शुरूआत कर दी गई है। आगामी 6 महीनों में प्रदेश के अन्य जिला अस्पतालों में
इसकी शुरूआत कर दी जायेगी। जिलों के बाद सी.एच.सी. स्तर पर भी ऐसी इकाईयां
स्थापित की जायेगी। उन्होंने बताया कि प्रसव पश्चात घर पर नवजात शिशु
देखभाल के लिए भी उपाय किये जा रहे हैं। इसके लिए आशा कार्यकर्ता को
प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि नवजात के जन्म के बाद उसके स्वास्थ्य को
सुरक्षित बनाये रखने के लिए किसी प्रकार का लक्षण दिखाई दे तो उसे तुरंत
स्वास्थ्य केन्द्र पर रेफर किया जा सके।
उन्होंने बताया कि इंदिरा बाल स्वास्थ्य योजना के तहत 0 से 18 साल
तक के बच्चों की शारीरिक जांच की जायेगी। इस कार्य में शिक्षा व महिला एवं
बाल विकास विभाग का सहयोग लिया गया है। जांच के तहत बच्चों में खून की कमी,
किसी तरह की बीमारी व डिसएब्लिटी को चैक किया जायेगा। जरूरतमंद बच्चों को
चश्में बांटे जायेंगे। यहां तक की हृदय की सर्जरी तक करने का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि स्टील बर्थ यानि पेट में ही बच्चे की मृत्यु न हो इसके
लिए भी उपाय किये जा रहे हैं ताकि शिशु मृत्यु दर को कम से कम किया जा सके।
फिलहाल हरियाणा में शिशु मृत्यु दर 1000 के पीछे 52 है। इन कार्यो पर व्यय
होने वाली सारी राशि हरियाणा सरकार वहन करेगी।डाक्टर राकेश गुप्ता ने
पत्रकारों के समक्ष नकली दवाईयों की बिक्री और उस पर रोक लगाने की योजना का
भी विस्तार से खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जहां से भी सूचना मिलेगी
वहां तुरंत रेड की जायेगी और इस कार्य में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ
कड़ी कार्यवाही की जायेगी क्योंकि नकली दवाईयां बेचना व बनाना अमानवीय
कार्य है। नकली दवाई खाने से रोगी मर भी सकता है और इस पर पूर्णत: रोक होनी
चाहिए। इसके लिए प्रदेश के इंटलीजेंस नेटवर्किंग को सुदृढ़ बनाया जा रहा
है। प्रैस वार्ता में अतिरिक्त उपायुक्त एम.के. पांडुरंग तथा सिविल सर्जन
वंदना भाटिया उपस्थित थी



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