Thursday, July 14, 2011

नहरों के जर्जर हो चके तटबंधों पर नहीं दिया जा रहा ध्यान

रादौर,(कुलदीप सैनी)
जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ बचाव कार्यो हेतू करोड़ों रूपये खर्च करने की बात तो की जा रही है। लेकिन आबादी क्षेत्र से बहने वाली नहरों के तटबन्धों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इन नहरों के किनारों की स्थिति पर अगर नजर डाली जाए तो कब ये जर्जर हुए किनारे टूटकर क्षेत्र के लिए बाढ़ का कारण बन जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। समय रहते यदि विभाग द्वारा इन जर्जर किनारों की मुरम्मत नही की गई तो इन नहरों का पानी फसलों के साथ-साथ आबादी क्षेत्र में भी नुकसान कर सकता है।
                           रादौर क्षेत्र में बहने वाली पश्चिमी यमुनानहर जिसकी क्षमता 11 हजार क्यूसिक व  आवर्धन नहर की क्षमता तीन हजार चार सौ क्यूसिक की है। इन नहरो के किनारों की स्थिति कई स्थानों से जर्जर हो चुकी है। बावजूद इसके प्रशासन व विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। जबकि बीते वर्ष कुरूक्षेत्र व अंबाला जिले में हुई तबाही का कारण क्षेत्रिय नहरों के किनारों की मजबूती न होना थी। जिस कारण इन जिलों के लोगों को करोड़ो रूपये का नुकसान झेलना पड़ा था। स्थानीय निवासी कुलभूषण, मनीष कुमार, अनिल, बलबीर सिंह, सुखदेव, सुभाष आदि का कहना है कि अगर जल्द ही इन नहरो के किनारों की मुरम्मत नहीं की गई। तो ये उनके लिए खतरे कारण बन सकती हैं। उन्होने जिला उपायुक्त से मांग की है कि जर्जर हुए इन किनारों को दूरूस्त किए जाए।


जेएमआईटी इंजीनियरिंग कालेज में शुरू हुई काउंसलिंग
रादौर,(कुलदीप सैनी)
आल इंडिया काऊंसिल फॅार टैक्रीकल एजूकेशन द्वारा रादौर स्थित जेएमआईटी इंजीनियरिंग कालेज की मान्यता रद्द करने की चर्चाओं के बाद आज यहंा कालेज प्रशासन द्वारा मैनेजमेंट की सीटों के लिए काऊंसलिंग का आयोजन किया गया। कालेज कैम्पस में आयोजित हुई  इस काऊंसलिंग में 165 सीटों के लिए होनी थी। जबकि गर्वनमेंट कोटे की 480 सीटों में से 448 सीटें पहले ही भरी जा चुकी है। काऊंसलिंग में भाग लेने के लिए 1500 बच्चों ने आवेदन किये थे। जिनकी आज यहां पर काऊंसलिंग की गई। आज सुबह से ही कांऊसलिंग में हिस्सा लेने के लिए दूर-दराज से अपने परिजनों के साथ छात्र यहां पर पहुंचे थे। जिससे कालेज परिसर में काफी रौनक दिखाई पड़ी। गौरतलब है कि क्षेत्र में इस प्रकार की चर्चाओं से माहौल गर्म बना हुआ था कि नियम पूरे न करने पर एआईसीटीई ने कालेज की मान्यता रद्द कर दी है। लेकिन जैसे ही आज  कालेज में समपन्न हुई काऊंसलिंग से सभी चचाओं पर विराम लग गया।कालेज के जनरल सक्रेट्री डा. रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि  एआईसीटीई द्वारा कालेज प्रशासन को जो भी नियम पूरे करने के निर्देश दिए गए थे।  कालेज ने उन सभी नियमों को पूरा कर लिया है। उसके बाद ही सस्ंथान की तरफ से मैनेजमैंट की सीटों के लिए काऊंसलिंग का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि कालेज में दाखिला देने के लिए पूरी पारदर्शिता से कार्य किया जा रहा है। ताकि किसी भी प्रकार की छात्रों को परेशानी न हो। उन्होने कहा कि संस्थान में किसी भी प्रकार की सिफारिश को स्थान नहीं दिया जाता। बल्कि मेरिट के आधार पर ही बच्चों को दाखिला दिया जा रहा है।  हाईकोर्ट में कालेज की ओर से चल रहे केस के जवाब में उन्होंने कहा कि वह भी एआईसीटीई की एक कार्यप्रणाली का हिस्सा है। ताकि बच्चों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो। इस अवसर पर प्रिसींपल डा. रणधीर सिंह, रजिस्ट्रार ईश्वर अग्रवाल, पं० ज्ञानप्रकाश शर्मा, विवेक शर्मा, संजीव गर्ग, विक्रम वर्मा, मनोज अरोड़ा, रजत कपिला, नितिन सहगल, यूपी सिंह, रणजीत चौहान, राजेश भारद्वाज आदि उपस्थित थे।




अधिग्रहण के नाम पर धार्मिक स्थलों पर प्रशासन ने चलाया पीला पंजा,
यमुनानगर,(कुलदीप सैनी)
जिला प्रशासन द्वारा आज धार्मिक स्थलों पर पीला पंजा चलाकर गिरा दिया गया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन की कार्रवाई वर्कशाप रोड के किनारे बने तीन मंदिरों को अधिग्रहण के नाम पर गिराने से आरंभ हुई। उधर, प्रशासन की इस कार्रवाई से विभिन्न हिंदु संगठनों में रोष है।सुबह के दौरान ड्यूटी मेजिस्ट्रैट परमजीत सिंह चहल, नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी बीबी भारद्वाज और एमई विनोद गुप्ता ने टीम का गठन कर जगाधरी वर्कशाप रोड़ पर स्थित तीन शिव मंदिरों को गिराने की कार्रवाई आंरभ की। इन मंदिरों के तोडऩे के दौरान आस पास के दुकानदार व भारी संख्या में लोग यहां पहुंच गये और उन्होंने  इन मंदिरों को तोडऩे का कड़ा ऐतराज किया।
आला अधिकारी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सुप्रिम कोर्ट के निर्देशानुसार इन मंदिरों को तोड़ा गया है क्योकि यह ट्रैफिक बाधित थे और अवैध रूप से बने हुए थे।  हिंदु संगठनों का कहना है कि प्रशासन ने यह कार्रवाई उस समय की है जिस समय भारतीय संस्कृति व सभ्यता के अनुसार देवी-देवताओं को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। प्रशासन ने पूर्व में ही सडक़ के किनारे व पंचायती जमीनों पर बने मंदिरों को हटाने के लिए आदेश जारी किए थे। इन आदेश के तहत ही सडक़  के किनारों से इन मंदिरों को हटाया गया है। पूर्व में भी इसी प्रकार मंदिरों को हटाने का काम जिला प्रशासन द्वारा किया गया था। विश्व हिंदु परिषद व देवैज्ञ ब्राह्मण परिषद के पंडित उदयवीर कौशिक का कहना है कि वे प्रशासन के खिलाफ नहीं है लेकिन प्रशासन को इस प्रकार का कार्य करने से पूर्व हिंदु संगठनों के प्रतिनिधियों को अपने साथ लेना चाहिए था ताकि मंदिरों में प्रतिष्ठित देवी-देवताओं को उचित स्थान पर पूजा के लिए विराजमान किया जाता । कौशिक ने कहा कि दो दिन पूर्व ही देवशायनी एकादशी शुरू हुई है और इस एकादशी से लेकर देव उठावनी एकादशी तक देवी-देवता चिर निद्रा में चले जाते हैं और ऐसे में उनको कहीं और भी स्थापित नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि दीवाली तक मंदिरों की यथास्थिति रहनी चाहिए थी और दीवाली के बाद वे खुद ही इन मंदिरों से देवी-देवताओं को अन्य स्थान पर प्रतिष्ठित कर देते। इसी प्रकार पंडित मोहन लाल शर्मा, आचार्य मुकेश शर्मा आदि ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई को गलत करार दिया है जो इन दिनों में की गई है।




दहेज उत्पीडऩ मामलों में आठ के खिलाफ  मामला दर्ज
यमुनानगर,(कुलदीप सैनी)
अदालत के आदेश पर पुलिस ने ससुराल पक्ष के तीन लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीडन का मामला दर्ज किया है। वहीं एक अन्य दहेज उत्पीडन के मामले में पुलिस ने पीडि़त महिला के ब्यान पर उसके पति समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
गुलाब नगर निवासी रूपा रानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका विवाह कुछ समय पहले गांधी नगर कुरूक्षेत्र निवासी नरेश कुमार के साथ हुआ था। विवाह में उसके माता-पिता ने अपनी हैसियत के अनुसार काफी दान दहेज देकर विदा किया था। विवाह होने के कुछ समय बाद उसके पति ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया और दहेज के सामान की मांग करने लगा। विवाहिता के परिजन की और सामान देने की हैसियत नहीं थी, लेकिन ससुराल पक्ष के लोग विवाहिता को दहेज को लेकर प्रताडि़त करते रहते थे। जिसकी शिकायत उसने अपने परिजनों से की और एक दिन उसके पति ने दहेज को लेकर उसे पीट-पीट कर घर से निकाल दिया। जिसकी शिकायत उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर स्थानीय थाने में की। थाने में काफी समय तक कोई कार्रवाई ना होने के कारण उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। जिला न्यायाधीश ने मामले में सुनवाई करते हुए स्थानीय थाने को आरोपी पति नरेश कुमार, संजीव कुमार और किशनादेवी के खिलाफ दहेज प्रताडऩ का मामला दर्ज करने के आदेश जारी किये। पुलिस ने अदालत के आदेशानुसार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी। उधर, देवी भवन बाजार निवासी नेहा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि कुछ समय पहले विष्णु नगर निवासी मन्नू के साथ हुई थी, लेकिन कुछ समय पश्चात उसके पति व ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे दहेज को लेकर परेशान करना शुरू कर दिया, जिसकी शिकायत उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर स्थानीय थाने में की। पुलिस ने पीडि़त विवाहिता की शिकायत पर आरोपी पति मन्नू, ससुर जयालाल, इंदिरा रानी, जेठ कमल, जेठानी रीतू के खिलाफ दहेज उत्पीडन का मामला दर्ज करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।



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