घरौंडा:- 8 जुलाई (प्रवीन सोनी)
केंद्र सरकार द्वारा जहां बच्चों को उच्च शिक्षा देने के लिए शिक्षा का अधिकार जैसे कानून बनाकर पूरे देश में इसे कढ़ाई से लागू करने के आदेश दे रखे है। वहीं रिफाईनरी के आस-पास पड़ी झुग्गी-झोपडिय़ों में रह रहे हजारों परिवारों के बच्चे स्कूल न जाने के कारण अनपढ़ता का शिकार हो रहे है। झुग्गी-झोपडिय़ों में रहे श्रमिकों का कहना है कि मेहनत-मजदूरी करने के लिए वे सुबह के समय ही अपनी झोपडिय़ों से बाहर मजदूरी करने चले जाते है और देर शाम को लौटते है।
रिफाइनरी के आस-पास बनी झुग्गी-झोपडिय़ों में मौजूद शिक्षा से वंचित बच्चे।
छाया-तेजबीर
श्रमिक होने के कारण वे अपने बच्चों को स्कूल में नही भेज पाते। हालांकि रिफाईनरी प्रशासन स्कूलों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष लाखों रूपए की सहायता देता रहता है। आज तक किसी भी रिफाईनरी अधिकारी का ध्यान इन झुग्गी-झोपडिय़ों के बाहर खेल रहे किसी बच्चे पर नही गया।
रिफाईनरी के आस-पास ददलाना, कुताना, सिंगपुरा, रिफाईनरी कोको पुल के आस-पास पड़ी झुग्गी-झोपडिय़ों में रह रहे बद्री प्रसाद, सुदामा, अनवर, अखिलेश, मजहर, महमूद, शशिबाला, सियाबाई, शामली एवं रैना आदि ने बताया कि वे मूलत: उतर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड से यहां आए हुए है। रिफाईनरी में मेहनत-मजदूरी कर अपनी आजीविका कमाने में लगे हुए है। मेहनत-मजदूरी करने के बाद वे अपने लिए इतने साधन नही जुटा पाते कि वे अपने बच्चों को पढाई करवाने के लिए स्कूलों में भेज सकें। उनका कहना है कि बच्चों का पेट पालना मुश्किल हो रहा है तो ऐसे में स्कूलों का खर्च कहां से वहन करें। इन बाहरी श्रमिकों का कहना है कि रिफाईनरी प्रशासन हर वर्ष शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लाखों रूपए खर्च कर देता है, लेकिन किसी भी अधिकारी का ध्यान झुग्गी-झोपडिय़ों में रह रहे इन बच्चों पर नही गया। श्रमिकों ने मांग की है कि झोपडिय़ों के आसपास शिक्षा का उचित प्रबंध करवाया जाए ताकि उनके बच्चे भी शिक्षा प्राप्त कर सकें।

No comments:
Post a Comment