इन्द्री सुरेश अनेजा
गुरु पूर्णिमा गुरू पूजन का दिन होता है। इस दिन को गुरू की पूजा करने के
रूप में भी मनाया जाता है। समस्त भारत में गुरू पूजन का यह पर्व बड़ी
श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरू के दरबार
में जाकर उनकी वंदना करके उनका आशीर्वाद पाते हैं। गुरू पूर्णिमा के दिन को
व्यास पूर्णिमा के दिन से भी जाना जाता है। इन्द्री में भी गुरू पूर्णिमा
के शुभ अवसर पर शुक्रवार को बाबा बू अली शाह कलंदर साहिब जी की दरगाह पर
भक्तों ने माथा टेक अपना भाग्य संवारा। इस अवसर पर शिष्यों ने गुरू
राजकुमार की पूजा अर्चना की तथा उनका आशीर्वाद पाया। इस मौके पर सैंकड़ों
की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। गुरू पूजन के बाद भंडारे का आयोजन भी
किया गया जिसमें सभी उपस्थित भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसी प्रकार
नेवल स्थित संत आसाराम बापू जी के आश्रम में भी गुरू पूर्णिमा का त्योहार
मनाया गया। वहां पर भी श्रद्धालुओं ने अपने गुरू के समक्ष माथा टेका एवं
गुरू का आशीर्वाद पाया। गुरू पूजन के एक अन्य कार्यक्रम में जुंटला गेट
स्थित दरबार श्री कलंदर साहिब की ओर से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर बाबा बू अली शाह कलंदर साहिब
जी के दरबार पर माथा टेका। श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज श्री रामकरण जी से
आशीर्वाद लिया। दूर दराज से आए लोगों ने गुरु जी की पूजा अर्चना की।
इस
मौके पर श्रद्धालुओं को आर्शीवचन देते हुए महाराज श्री रामकरण जी ने कहा कि
गुरु बनाने के पश्चात ही पूजन कर्म, जप, तप इत्यादि का फल हमें प्राप्त
होता है। उन्होंने कहा कि जिसको आपने अपना गुरु मान लिया है उस पर कभी
संदेह न करें। उन्होंने कहा कि गुरु कभी कठोर होकर आपके धैर्य की परीक्षा
अवश्य लेता है, परंतु वह करूणा की मूर्ति होता है इसलिए गुरु पर विश्वास
करके इस संसार में सबकुछ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि दरबार
श्री कलंदर साहिब की ओर से सामाजिक तौर पर भी लोगों को जागरूक किया जाता
है। समय-समय पर जागरूकता रैली निकालकर व कार्यक्रमों का आयोजन लोगों से
कन्या भ्रूण हत्या के रोकथाम की अपील की जाती है। इसके अलावा दहेज प्रथा,
नशाखोरी के प्रति भी लोगों को जागरूक कर उन्हें इससे दूर रहने का संदेश
दिया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए अटूट भंडारा भी लगाया गया।
इससे पूर्व हवन यज्ञ किया गया। श्री सत्यनारायण जी की कथा हुई और गुरु पूजा
की रस्म अदा की गई। रात के समय कव्वालियों का भव्य आयोजन हुआ। देश के जाने
माने कव्वाल असलम बजमी बाबा जी की शान में कव्वालियों के माध्यम से गुरू
महिमा का गुणगान किया। श्रद्धालु भी अपने गुरु की महिमा का गुणगान सुन झूम
उठे।

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