Thursday, July 7, 2011

प्रतिभा के सामने विकलांगता हुई पराजित

घरौंडा(प्रवीन सोनी)
प्रतिभा के आगे विकलांगता आड़े नही आती और प्रतिभावान खिलाड़ी विकलांगता को भी पराजित करके जीत हासिल कर सकते है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है गांव गगसीना के खिलाड़ी अरूण ने। दसवीं कक्षा का छात्र अरूण मानसिक रूप से कमजोर होने के साथ साथ सुन व बोल नही सकता। इसके बावजूद भी उसने जर्मनी में हुई स्केटिंग ऑलम्पिक प्रतियोगिता में एक स्वर्ण व दो रजत पदक जीत कर अपनी विकलांगता को अपनी प्रतिभा के सामने बौना साबित कर दिया है। 
जर्मनी में आयोजित स्केटिंग प्रतियोगिता में  पदक जीतकर लौटे अरूण कुमार का फूलमालाओं से स्वागत करते ग्रामीण                                                      छाया-तेजबीर 
दिल्ली हवाई अड्डे से घरौंडा आने पर अरूण के परिजनों के अलावा सैंकड़ों ग्रामीणों ने उसका भव्य स्वागत किया। ग्रामीणों ने अरूण को फूल मालाओं से लाद दिया व कहा कि हमें अपने होनहार बेटे पर नाज़ है। बोल व सुन न सकने के कारण भी अरूण दूसरे बच्चो से अलग है। 25 जून से 4 जुलाई तक जर्मनी में आयोजित तेरहवीं स्पेशल ओलम्पिक वल्र्ड स्केटिंग केम्प के दौरान 500 मीटर में एक गोल्ड व 300 व 200 मीटर स्केटिंग में दो रजत पदक जीतने में कामयाबी हासिल की। विदेशी धरती पर तिरंगा फहरा कर लौटे अरूण कुमार का गांव गगसीना में पहुंचने पर ग्रामवासियों द्वारा जोरदार स्वागत किया। 
अरूण के पिता तेजबीर, आजाद संधू, रामनिवास, सुनहेरा, दिलबाग सिंह व रकम सिंह आदि का कहना है कि अरूण ने देश व प्रदेश का नाम रोशन किया है। ऐसे में सरकार को अरूण के लिए रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि अरूण 100 प्रतिशत् विकलांग होने के बाद भी बेहतरीन खिलाड़ी है। 

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