Tuesday, July 12, 2011

परामर्श केन्द ने घरेलू हिंसा के 35 मामले निपटाये

करनाल विजय काम्बोज     
    घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम के तहत जिला में स्थापित परामर्श केन्द्र में गत अप्रैल माह से जून, 2011 तक 98 शिकायतें दर्ज हुई इनमें से उक्त केन्द्र के संरक्षण अधिकारी ने 35 शिकायतों का दोनों पक्षों की आपसी सहमति से समझौता करवा दिया है व 34 शिकायत कत्र्ताओं ने परामर्श के बाद अपनी शिकायतें वापिस ले ली तथा शेष शिकायतों पर समझौते के लिए कार्यवाही जारी है।
        इस संबंध में जानकारी देते हुए उपायुक्त श्रीमती नीलम पी. कासनी ने बताया कि घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के अन्तर्गत सविता राणा, को सरंक्षण अधिकारी के रूप में नियुक्त किया हुआ है। घरेलू हिंसा से पीडि़त जिले की कोई भी महिला अपने सरंक्षण के लिए लघु सचिवालय के तीसरे तल पर स्थित सरंक्षण अधिकारी के कार्यालय से सम्पर्क करके अपनी पीड़ा का ब्यौरा मौखिक या लिखित रूप में दे सकती है। उन्होंने बताया कि गत 3 माह के दौरान परामर्श केन्द्र में पंजीकृत 98 शिकायतों में से 10 शिकायतें जिला न्यायालय द्वारा, 70 पुलिस विभाग द्वारा व 18 शिकायतें सीधे तौर पर लोगों द्वारा दर्ज करवाई गई।
        श्रीमती कासनी ने इस अधिनियम के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि घरेलू हिंसा के अन्तर्गत महिला के साथ मार-पीट करना, चोट पहुंचाना अथवा जख्मी करना, यौन उत्पीडऩ, बेइज्जत करना, भददी गाली देना, चरित्र हनन करना, पीडि़ता अथवा उसके बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने से रोकना, नौकरी न करने देना, नौकरी छोडऩे के लिए विवश करना, महिला को घर में बंधक बनाना, किसी से मिलने से रोकना, जबरन शादी करना, पीडि़ता को आत्म हत्या के लिए मजबूर करना, पीडि़ता एवं उसके बच्चे को जीवन यापन हेतु, भोजन, कपड़ा व दवाईयों के लिए पैसा न देना, रोजगार करने से रोकना अथवा रोजगार में बाधा डालना, पीडि़ता से उसकी तनख्वाह छीनना तथा स्वयं उसके लिए खर्च करने से रोकना, घर से जबरन बाहर निकाल देना अथवा घर के किसी हिस्से में जाने से रोकना, सामान्य घरेलू चीजों के खरीदने की अनुमति न देना तथा किराए पर लिए गए रिहायशी मकान के लिए किराए की अदायगी न करना आदि शामिल है। इस तरह की किसी भी घरेलू हिंसा होने पर पीडि़त महिला संरक्षण अधिकारी से सम्पर्क कर सकती है।
        संरक्षण अधिकारी सविता राणा ने बताया कि महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने के लिए आंगनवाड़ी केन्द्रों व अन्य महिला संगठनों के बीच पहुंचकर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है। उन्होंने बताया कि गत 3 माह के दौरान 88 शिकायत कत्र्ताओं को परामर्श दिया गया, 3 महिलाओं को सेल्टर होम की सुविधा दिलवाई, 2 महिलाओं को मेडिकल सहायता तथा 4 महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता दिलवाई गई है। इसके अलावा बाल विवाह से संबंधी 10 मामले पंजीकृत हुए इनमें से 4 बाल विवाह को परामर्श द्वारा रूकवाया गया, 3 पुलिस विभाग को सौंप दिये गए तथा 3 मामले झूठे पाए गए।




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