महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना हर जरूरतमंद एवं बेरोजगार व्यक्तियों के सपनों को साकार करने में कारगर साबित हो रही है तथा उनके घर द्वार पर ही रोजगार के नये सुअवसर प्रदान किये है। करनाल जिला में मनरेगा के तहत 25 हजार 64 परिवारों के जॉब कार्ड बनवाए जा चुके हैं तथा उन्हें एक लाख 25 दिन का रोजगार उपलब्ध करवाया गया है। इस योजना के तहत 272 विकासात्मक कार्यो पर कार्य चल रहा है जिन पर 2 करोड़ 59 लाख 37 हजार रुपये की धनराशि खर्च हो चुकी है।
इस योजना के तहत सरकार ने एक परिवार को एक वर्ष में 100 दिन का रोजगार देने के लिए अधिनियम बनाया है और इसके बदले उन्हें न्यूनतम वेतन एक जनवरी 2011 के बाद अब अकुशल मजदूर को 179 रुपये, अद्र्धकुशल मजदूर को 183 रूपये, कुशल मजदूर को 188 तथा अत्याधिक कुशल मजदूर को 198 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती है जो कि देश में सर्वाधिक है। मनरेगा के दो महत्वपूर्ण लाभ हैं । पहला इससे गांवों मे विकास होता है, दूसरा बेरोजगारों को उनके घर-द्वार पर ही रोजगार मिलता है । इस योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला हर व्यक्ति ले सकता है। उसके लिए किसी प्रकार की औपचारिकता की जरूरत नहीं पडती । रोजगार पाने के इच्छुक परिवार को सम्बन्धित ग्राम पंचायत के पास अपना पंजीकरण करवाकर जॉब कार्ड बनवाना अनिवार्य है। प्रत्येक परिवार को एक पंजीकरण नम्बर मिलता है। परिवार के किसी सदस्य के सरकारी होने मात्र से रोजगार देने से मना किया जा सकता। जॉब कार्ड जारी होने की तारीख से 5 वर्षो तक मान्य होगा। यदि किसी का कार्ड 15 दिन के अन्दर-अन्दर नहीं मिलता तो वह अपने खण्ड विकास अधिकारी से सम्पर्क करें। इस योजना के तहत एक परिवार को एक से अधिक जॉब कार्ड नहीं दिया जा सकता है। इस जॉब कार्ड पर पंजीकरण संख्या होगी व जॉब कार्ड आवेदक को निशुल्क दिया जाता है। अगर किसी का कार्ड गुम हो जाता है तो वह डुप्लीकेट कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है लेकिन उस आवेदन पर कार्रवाई व जांच ग्राम पंचायत करेगी ।
उपायुक्त श्रीमती नीलम पी. कासनी ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना के तहत बेरोजगार व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध करवाया जाता है। इसके लिए व्यक्ति का क्षेत्र व उसी गांव का होना जरूरी नहीं है । यह रोजगार केवल उसी व्यक्ति को दिया जाएगा जिसके पास पंजीकरण कार्ड होगा। इस योजना के तहत मजदूर के लिए प्राथमिक चिकित्सा देने व छायादार जगह देने का प्रावधान भी है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना के तहत गांव में कच्ची गली को पक्का बनाना, सिंचाई के साधन बनाना, गांव के विकास, पर्यावरण सम्बन्धी कार्य, पौधे लगाना, जोहड़ों की खुदाई कराना तथा पुराने जोहडों की मरम्मत आदि कार्यो के तहत लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया करवाए जायेंगे। केन्द्र सरकार ने ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिये अनेक योजनाओं को समायोजित करके मनरेगा योजना में विकास कार्यो के लिये अनुदान राशि प्रदान करवाई जा रही है। इस योजना में अब कृषि व उद्यान विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं व फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। मनरेगा योजना में 5 एकड़ से कम जमीन वाले कृषक अपने खेत में कांग्रेस घास को उखाडऩे, घर से गोबर व कूड़ा-करकट को खेत में पहुंचाने तथा फसलों की खुदाई व नुलाई इत्यादि कार्य की मजदूरी मनरेगा योजना के तहत प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत वितरित किये गये 100-100 गज के रिहायशी प्लाटों में मिटटी भरने का कार्य भी मनरेगा योजना में करवाया जायेगा। ग्राम पंचायत मस्टरोल, बिल, बोचर, मेजरमैट बुक, स्वीकृति आदेश की प्रति, लेख-अभिलेख आदि कागजातों को ग्राम सभाओं के समक्ष प्रस्तुत करेगी ।
पंजीकरण के उपरान्त पंचायत से अपना जॉब कार्ड भी प्राप्त करने के पश्चात सरपंच को क ाम के लिए आवेदन कर सकतें है। पंजीकरण के बाद ग्राम पंचायत उसे 15 दिन के अन्दर-अन्दर काम देगी,यदि पंचायत ऐसा नहीं करती है तो उस व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दिये जाने का प्रावधान है। बेरोजगारी भत्ते के तहत पहले 30 दिन 25 प्रतिशत व उसके बाद 70 दिन तक 50 प्रतिशत न्यूनतम वेतन के बराबर बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। यह वेतन हर सप्ताह या अधिक से अधिक 15 दिन के बाद दिये जाने का प्रावधान है। इस योजना के तहत जो काम दिया जायेगा। वह 5 कि.मी. से दूर नहीं होगा। यदि इससे दूर होगा तो उसके लिये 10 प्रतिशत अधिकतम न्यूनतम वेतन दिया जायेगा। इस योजना के तहत महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। यदि कार्य करते समय किसी मजदूर की दुर्घटना होने पर मृत्यु हो जाती है तो उसको सरकार की तरफ से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वरूप दी जायेगी।

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