Monday, July 4, 2011

नियमों को ताक पर रख कर बिना जांच किए जारी किए जा रहे है प्रमाण-पत्र।



घरौंडा: 4 जुलाई(प्रवीन सोनी)
प्रदूषण विभाग की लापरवाही के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने पैट्रोल पम्पों पर लगे प्रदूषण जांच केंद्र वाहन चालकों के साथ खुलेआम धोखाधड़ी कर सरकार व जनता को लाखों रूपए का चूना लगा रहे है। ऐसा नही है कि प्रदूषण विभाग या प्रशासन को इसकी खबर न हो लेकिन विभाग द्वारा इस ओर से आंख मूंद कर कोई कार्यवाही न करना, विभाग की कार्यकुशलता पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। 
घरौंडा में एक प्रदूषण जांच केंद्र पर जांच के लिए खड़ी कार |छाया-तेजबीर
वाहनों द्वारा उगलने वाले धुंए में प्रदूषण के स्तर की जांच के लिए हाईवे पर जगह जगह सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रदूषण जांच केंद्र लगाए हुए है। जिन पर बड़े बड़े शब्दों में चार गैस, छह लाईन दिल्ली वाला, फोटो सहित जांच केंद्र लिखा हुआ होता है। नियमानुसार इन जांच कें द्रों द्वारा  वाहन के धुएं की जांच कर धुएं के साथ निकलने वाली जहरीली गैसों की मात्रा चेक करके प्रमाण पत्र जारी करने होते है। लेकिन जीटी रोड़ पर किनारे दिखाई देने वाले केंद्र प्रदूषण जांच की आड़ में सभी नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी जांच के वाहनों को प्रदूषण नियंत्रित वाहन होने का प्रमाण पत्र जारी कर देते है। प्रमाण पत्र जारी करने से पहले कोई चेकिंग नही की जाती। बिना धुंए की जांच किए धुंए से निकली गैसों की मात्रा को प्रमाण पत्र में दर्शा दिया जाता है। 
प्रदूषण जांच केंद्र द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र दिखाता ग्राहकछाया-तेजबीर
सोमवार को जीटी रोड़ पर स्थित एक प्रदूषण जांच केंद्र पर इंडिका कार की जांच की जा रही थी लेकिन बिना धुएं की जांच किए मात्र पचास रूपए देकर वाहन मालिक को प्रदूषण नियंत्रित वाहन होने का प्रमाण पत्र मिल गया। इस केंद्र पर मौजूद कर्मचारी से बातचीत की गई तो पता चला कि धुएं जांच की मशीन खराब होने की वजह से बिना जांच किए ही प्रमाण पत्र दिया है। इसी प्रकार एक अन्य जांच केंद्र पर भी बिना जांच के वाहन चालकों को प्रमाण पत्र दिए गए। इससे साफ जाहिर होता है कि नियमों को ताक पर रखकर प्रदूषण जांच केंद्र वाहनों की जांच के प्रति गंभीर नही है और ऐसे केंद्रों द्वारा दिन में सैंकड़ों वाहनों को बिना किसी जांच के ही प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते है। जिसकी वजह से वातावरण में दिनों दिन प्रदूषण बढृता जा रहा है। 
सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यदि वास्तव में प्रदूषण को नियंत्रित करना चाहते है तो ऐसे जांच केंद्रो पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है। इस संबंध में थाना प्रभारी भगवान दास का कहना है कि पुलिस द्वारा समय समय पर वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्रों की जांच की जाती है और जिन वाहन चालकों के पास प्रमाण पत्र नही होते उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पुलिस केवल प्रदूषण प्रमाण पत्र के द्वारा ही जान सकती है कि वाहन प्रदूषण नियंत्रित है या नही।   

No comments:

Post a Comment